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ऋता शेखर 'मधु'
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मनहरण घनाक्षरी...पत्र विहीन पेड़ की उजड़ी हुई डाल कोदया भाव से कभी भी मन में न आँकिएयहीं पर के नीड़ में अवतरित पंख हैंउड़ रहे परिंदों में किरन भी टाँकिएइसने भी तो जिया है हरे पात फूल फलआज अस्त मौन बीच चुपके से झाँकियेफिर बसंत आएगा किसलय भी फूटेंगेपतझर में भले ही रेत सू...
ऋता शेखर 'मधु'
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मनहरण घनाक्षरी में बसंत का स्वागत...पीत पुष्प-हार में नख शिख श्रृंगार में, शीतल बयार में बासंती उल्लास हैकली-दल खुल रहे भँवरे मचल रहे, डाल डाल पात पात प्रेम का प्रभास हैखिल रहे पलाश से गगन लालिमा बढ़ी, अमराई की गंध में बौर का विन्यास हैदर्पण इतरा रहे सजनी के रूप पर...
 पोस्ट लेवल : छंद घनाक्षरी
sanjiv verma salil
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घनाक्षरी, संजीव, ghanakshari, sanjiv, chhand, छंद, .गीत-ग़ज़ल गाइये / डूबकर सुनाइए / त्रुटि नहीं छिपाइये / सीखिये-सिखाइएशिल्प-नियम सीखिए / कथ्य समझ रीझिए / भाव भरे शब्द चुन / लय भी बनाइएबिम्ब नव सजाइये / प्रतीक भी लगाइये / अलंकार कुछ नये / प्रेम से सजा...
sanjiv verma salil
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घनाक्षरी सलिला: २संजीव, छंदघनाक्षरी से परिचय की पूर्व कड़ी में घनाक्षरी के लक्षणों तथा प्रकारों की चर्चा के साथ कुछ घनाक्षरियाँ भी संलग्न की गयी हैं। उन्हें पढ़कर उनके तथा निम्न भी रचना में रूचि हो  का प्रकार तथा कमियाँ बतायें, हो सके तो सुधार  सु...
sanjiv verma salil
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घनाक्षरी: कल्पना मिश्रा बाजपेई सरस्वती . धवल वस्त्र धारणी सुभाषिनी माँ शारदे     ८-८  वीणा-पाणि वीणा कर धारती हैं प्रेम से      ८-७ मुख पे सुहास माँ का देखते ही बन रहा      ८-८ जग सारा विस्म...
sanjiv verma salil
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घनाक्षरी: एक परिचय संजीव *हिंदी के मुक्तक छंदों में घनाक्षरी सर्वाधिक लोकप्रिय, सरस और प्रभावी छंदों में से एक है. घनाक्षरी की पंक्तियों में वर्ण-संख्या निश्चित (३१, ३२, या ३३) होती है किन्तु मात्रा गणना नहीं की जाती. अतः, घनाक्षरी की पंक्तियाँ समान...
अरुण कुमार निगम
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हेमंत ऋतु (1)शरद ला बिदा देके , आये हे हेमंत ऋतुकँपकपासी लागथे , भुर्री ला जलावौ जीधान के मिंजाई होगे,रबी के बोवाई होगेनवा मूंगफल्ली आगे, भूँज के खवावौ जी |कुसियार मेछरावै , बिही जाम गदरावैछीताफर आँखी मारै, मन भर खावौ जीखोखमा सिंघाड़ा आगे,जिमीकाँदा निक लागेखावौ पि...