ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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सिंधु तट पर एक सिंदूरी शाम गुज़र रही थीथी बड़ी सुहावनी  लगता था भानु डूब जाएगा अकूत जलराशि में चलते-चलते बालू पर पसरने का मन हुआ भुरभुरी बालू पर दाहिने हाथ की तर्जनी से एक नाम लिखा सिंधु की दहाडतीं...
Shachinder Arya
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{यह भी बारिश में होने की एक स्टीरियोटाइप कहानी है। छोटी-सी कहानी। बारिश के पानी में भीगते हुए भागने की कहानी। उनके पास छाता नहीं है, जिसे हम छतरी कहते हैं। इसलिए दोनों भीग जाएँगे।} बूँदें थीं, कि रुक नहीं रही थी। उन्हे तीन दिन हो गए, लगातार। अपने वजन को सहन न...
Kheteswar Boravat
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ललित शर्मा
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दिनेशराय द्विवेदी
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घोंघा एक विशेष प्रकार का जंतु है जो अपने जीवन को एक कड़े खोल में बिता देता है। इस के शरीर का अधिकांश हिस्सा सदैव ही खोल में बंद रहता है। जब इसे आहार आदि कार्यों के लिए विचरण करना होता है तो यह शरीर का निचला हिस्सा ही बाहर निकालता है जिस में इस के पाद (पैर) होते हैं...