ब्लॉगसेतु

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--सज्जनता बेहोश हो गई,दुर्जनता पसरी आँगन में।कोयलिया खामोश हो गई,मैना चहक रहीं उपवन में।।--गहने तारे, कपड़े फाड़े,लाज घूमती बदन उघाड़े,यौवन के बाजार लगे हैं,नग्न-नग्न शृंगार सजे हैं,काँटें बिखरे हैं कानन में।मैना चहक रहीं उपवन में।। --मानवता की झोली खाली,दानवत...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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मिटकर मेहंदी को रचते सबने देखा है,उजड़कर मोहब्बत कोरंग लाते देखा है?चमन में बहारों काबस वक़्त थोड़ा है,ख़िज़ाँ ने फिर अपनारुख़ क्यों मोड़ा है?ज़माने के सितम सेन छूटता दामन है,जुदाई से बड़ाभला कोई इम्तिहान है?मज़बूरी के दायरों मेंहसरतें दिन-रात पलीं,मचलती उम्मीदेंकब क़दम...
Akhilesh Karn
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फिल्म : भैया तोहार सालीगायक: मनोज तिवारी मृदुलगीतकार:संगीतकार : धनंजय मिश्राबसंती चमन में बसंती चमन मेंबसंती चमन में चहकी जाला केहूबसंती चमन में चहकी जाला केहूबसंती चमन में चहकी जाला केहू होबसंती चमन में चहकी जाला केहूउमर ऐसने ह उमर ऐसने ह बहकी जाला केहूउमर ऐस...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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कैसा दौर आया हैआजकलजिधर देखो उधरहवा गर्म हो रही हैआया था चमन मेंसुकून की सांस लेनेवो देखो शाख़-ए-अमन परफ़ाख़्ता बिलख-बिलखकर रो रही है।दोस्ती का हाथबढ़ाया मैंने फूलों की जानिबनज़र झुकाकर फेर लिया मुँहशायद नहीं है वक़्त मुनासिबसितम दम्भ और दरिंदगी के सर...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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चंदा सुनेगा आज फिरमेरी वही कहानीभूलती नहीं कभीलगती बड़ी सुहानी।दोहराता है ये मनहै अजीब-सी लगनपूनम की रात आयीनूर-ए-चश्म लायीधरती पर चंदा नेधवल चाँदनी बिखरायी चमन-चमन खिला थामन बहार से मिला थाकली-कली पर ग़ज़ब शबाब थायायावर भ्रमर मनुहार से मिला थाहवा का रुख़ प्य...
sanjiv verma salil
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हिंदी के नए छंद ६  पाँच मात्रिक याज्ञिक जातीय आचमन छंद *पहली बार हिंदी पिंगल की आधार शिला गणों को पदांत में रखकर छंद निर्माण का प्रयास है। माँ सरस्वती की कृपा से अब तक ३ मात्रा से दस मात्रा तक में २०० से अधिक नए छंद अस्तित्व में आ चुके हैं। भानु जी के अनु...
Ravindra Pandey
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क्या मन कहुँ, क्या तन कहुँ...-------------***------------क्या मन कहूँ, क्या तन कहूँ,सर्वस्व तेरा, ऐ वतन कहुँ...मेरा रोम रोम, है तेरी धरा,एक फूल मैं, तुझे चमन कहुँ...क्या मन कहुँ......तेरे बाज़ुओं में, वो जान है,थामे तिरंगा, महान है...कई रंग है, जाति धर्म के...तुझे स...
शिवम् मिश्रा
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आदरणीय ब्लॉगर मित्रोंप्रस्तुत है आज का बुलेटिन उम्मीद है आपका स्नेह प्राप्त होगा |एक फूल जब चमन में खिल गयासारे गुलशन से ही वो अलग हुआज़िन्दगी सिमट गई उसकीवक़्त आखिरी जिंदगी का, उसका आ गयावो तो मासूम बेखबर था ज़माने सेवो तो अपनी ही हर सोच में उलझ गयाउस माली का किरदार...
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मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" सेएक ग़ज़ल"गद्दार मेरा वतन बेच देंगे"ये गद्दार मेरा वतन बेच देंगे।ये गुस्साल ऐसे कफन बेच देंगे।बसेरा है सदियों से शाखों पे जिसकी,ये वो शाख वाला चमन बेच देंगे।सदाकत से इनको बिठाया जहाँ पर,ये वो देश की अंजुमन बेच देंगे।लिबासों में मीनो...
अविनाश वाचस्पति
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