-- मात शारदे को कभी, मत बिसराना मित्र।मेधावी मेधा करे, उन्नत करे चरित्र।१।--कल तक जो बैरी रहे, आज बन गये मित्र।अच्छे-अच्छों के यहाँ, बिकते रोज चरित्र।२।--भावनाओं के वेग में, बह मत जाना मित्र।रखना हर हालात में, अपने साथ चरित्र।३। --आचरण में रहे, उज्जवल चित्र...