ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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चाँद सितारों से पूछती हूँ हाल-ए-दिल,  ज़िंदा जल रहे  हो परवाने की तरह ! मरणोपरांत रोशनी आत्मा की तो नहीं,    क्यों थकान मायूसी की तुम पर नहीं आती |हार-जीत का न इसे खेल समझो,  अबूझ पहेली बन गयी है ज़िंदगी, शमा-सी जल रह...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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तिमिर भय नेबढ़ाया हैउजास से लगाव,ज्ञानज्योति नेचेतना से जोड़ातमस कास्वरूपबोध और चाव।घुप्प अँधकार मेंअमुक-अमुक वस्तुएँपहचानने का हुनर,पहाड़-पर्वतकुआँ-खाईनदी-नालेअँधेरे में होते किधर?कैसी साध्य-असाध्यधारणा है अँधेरा,अहम अनिवार्यता भी हैसृष्टि में अँधेरा।कृष्णपक्ष कीविकट...
जेन्नी  शबनम
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चाँद (चाँद पर 10 हाइकु)   *******   1.   बिछ जो गई   रोशनी की चादर   चाँद है खुश।   2.   सबका प्यारा   कई रिश्तों में दिखा   दुलारा चाँद।   3.   सह न सका&n...
 पोस्ट लेवल : हाइकु चाँद
Sandhya Sharma
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करवा चौथमैं यह व्रत करती हूँअपनी ख़ुशी सेबिना किसी पूर्वाग्रह केकरती हूँ अपनी इच्छा सेअन्न जल त्यागक्योंकि मेरे लिएयह रिश्ता ....इनसे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण हैमेरे लिए यह उत्सव जीवन मेंउस अहसास की ख़ुशी व्यक्त करता हैकि उस ख़ास व्यक्ति के लिएमैं भी उतनी ही ख़ास हूँमैं उल...
अनीता सैनी
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पावन प्रीत के सुन्दर सुकोमल सुमन, सुशोभित स्नेह से करती साल-दर-साल,  अलंकृत करती है हृदय में प्रति पल वह,  फिर यादों का कलित मंगलमय थाल |  बाती बना जलाती साँसें कोअखंड ज्योति-सी, जीवन में प्...
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हिन्दी साहित्य काउभरता हुआ युवा सिताराअमन चाँदपुरी नहीं रहा...*****************मेरे लिए यह व्यक्तिगत क्षति है।11 अप्रैल, 2016 कौ मैंनेखटीमा में आयोजित दोहाकार समागम मेंउन्हें “दोहा शिरोमणि से अलंकृत किया था।*****************श्रद्धांजलि स्वरूप उन्हीं की एक क्षणिक...
sanjiv verma salil
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​एक द्विपदीजात मजहब धर्म बोली, चाँद अपनी कह जरापुज रहा तू ईद में भी, संग करवा चौथ के. ****http://divyanarmada.blogspot.in/
sanjiv verma salil
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मुक्तिकाचाँदनी फसल..संजीव 'सलिल'*इस पूर्णिमा को आसमान में खिला कमल.संभावना की ला रही है चाँदनी फसल..*वो ब्यूटी पार्लर से आयी है, मैं क्या कहूँ?है रूप छटा रूपसी की असल या नक़ल?*दिल में न दी जगह तो कोई बात नहीं है.मिलने दो गले, लोगी खुदी फैसला बदल..*तुम 'ना' कहो मैं '...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका चाँदनी muktika
sanjiv verma salil
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मुक्तिकाचाँदनी फसल..संजीव 'सलिल'*इस पूर्णिमा को आसमान में खिला कमल.संभावना की ला रही है चाँदनी फसल..*वो ब्यूटी पार्लर से आयी है, मैं क्या कहूँ?है रूप छटा रूपसी की असल या नक़ल?*दिल में न दी जगह तो कोई बात नहीं है.मिलने दो गले, लोगी खुदी फैसला बदल..*तुम 'ना' कहो मैं '...
Dr. Mohd. Arshad Khan
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(अहमद नगर का राज्य। दरबार लगा हुआ है। चाँदबीबी अपने दरबारियों के साथ बैठी हुई हैं। उनके चेहरे पर शोक की छाया विद्यमान है। दरबारियों के सिर झुके हुए हैं। कुछ क्षणों के बाद वज़ीर उठकर बोलता है।) वज़ीर   : बेगम साहिबा, हुज़ूरे-आला की जन्नत-परवाज़ के बाद सारी रि...