ब्लॉगसेतु

ऋता शेखर 'मधु'
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29 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा है| कहते हैं इस दिन चाँद सोलह कलाओं से युक्त होता है| हल्की ठंढ भी दस्तक देने लगती है| क्यों न इस सुहानी पूर्णिमा को हाइगा की नजर से देखा जाए| प्रस्तुत है प्रथम भाग...                    &...
Sandhya Sharma
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संग तेरा पाने क्या क्या करना होगा मितवा, सूरज सा उगना होगा या चाँद सा ढलना होगा.खूब चले मखमली राहों पर हम तो मितवा,काटों भरी राह में भी हँसकर चलना होगा.तारीकी राहों की खूब बढ चुकी है मितवा,चिंगारी को एक शोला बनके जलना होगा.तेरी आहट पे मचले हैं अरमान मेरे मितवा,लगता...
निहार ranjan
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ज़मीन ज़ुमाद, ना ज़ुमाद वक्तवही फैला आकाश, वही चाँद, वही टिमकते तारे हैं अब भी हीर है, राँझे हैं, और जमाने की दीवारें है कही खापवाले, कही पिस्तौलवाले, कही त्रिशूलवाले हर तरफ फिरती मेरी तलाश में प्यासी तलवारें हैं मुद्दत से बदनाम हुए है जो चले है राह-ए-इश्क ज़माने न...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल चाँद मुहब्बत
विनय प्रजापति
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सरफ़राज़ शाकिरसम्ते-कुहसार क्या है देखो तोआसमाँ झुक रहा है देखो तोबन गयी झील आइने जैसीअक्स उठा हुआ है देखो तोदूर तक नक़्शे-पा ही नक़्शे-पारास्ता हो गया है देखो तोमेरा साया जो साथ था अब तकरात से जा मिला है देखो तोपेड़ सारा बिखर गया लेकिनजूँ का तूँ घोंसला है देखो तोदश्त म...
विनय प्रजापति
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सरफ़राज़ शाकिरसिवांची गेट, मंगलियान की गली, जोधपुर, राजस्थानपेड़ पर पानी उगायें और देखेंधूप के कपड़े सिलायें और देखेंख़ाली-ख़ाली बादलों को छेड़ें चलकररेत को पट्टी पढ़ायें और देखेंघुप अन्धेरों से करें कुछ तो ठिठोलीरात भर हल्ला मचायें और देखेंदिल करें है हाथ धो लें जाँ से अप...
विनय प्रजापति
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ए. एफ़. नज़र, सवाई माधोपुरचूल्हा-चौका फाइल बच्चे दिन भर उलझी रहती हैवह घर में और दफ़तर में अब आधी-आधी रहती हैमिलकर बैठें दुःख सुख बाटें इतना हमको वक़्त कहाँदिन उगने से रात गये तक आपा-धापी रहती हैजिस दिन से तकरार हुई उन स्याह गुलाबी होंठों मेंदो कजरारी आँखों के संग छत...
विजय कुमार सप्पत्ति
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ये जो चाँद है न ,वो रात को निकलता है .....!!वैसे तो चाँद हर रोज निकलता है , पर कभी कभी अमावस आ जाती है ......और इस बार की अमावस अब खत्म नहीं होंगी कभी .....!
विजय राजबली माथुर
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लगभग 12 (अब  32)  वर्ष पूर्व सहारनपुर के 'नया जमाना'के संपादक स्व. कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर'ने अपने एक तार्किक लेख मे 1952 मे सम्पन्न संघ के एक नेता स्व .लिंमये के साथ अपनी वार्ता के हवाले से लिखा था कि,कम्यूनिस्टों और संघियों के बीच सत्ता की निर्णायक ल...
shashi purwar
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ऐ  चाँद ,  तू  मत  दिखा  मुझे   वो   नज़ारे     जिन्हें   मै  पा  नहीं  सकूं  .ऐ  चाँद  , तू   मत   कर  वो  इशारे   ...
 पोस्ट लेवल : छन्दमुक़त चाँद
Ashok kumar
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भूल गया अब ये दिल मेरा ,जो हुआ था गम इसे तेरा ।ढूढ़ता है तुम्हीँ को अब ये ,देखा है जब से चहरा तेरा । आईना आँखोँ का साफ है तेरा ,दिखता है इसमेँ चहरा सिर्फ मेरा ।सितारा कहूँ क्यूँ ? चाँद है तू मेरा ,तू जमीँ नहीँ आसमां है मेरा ।"अंजान" कैद पिँजरे मेँ परिन्दे की तरह ,स...