ब्लॉगसेतु

विनय प्रजापति
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सरफ़राज़ शाकिरसिवांची गेट, मंगलियान की गली, जोधपुर, राजस्थानपेड़ पर पानी उगायें और देखेंधूप के कपड़े सिलायें और देखेंख़ाली-ख़ाली बादलों को छेड़ें चलकररेत को पट्टी पढ़ायें और देखेंघुप अन्धेरों से करें कुछ तो ठिठोलीरात भर हल्ला मचायें और देखेंदिल करें है हाथ धो लें जाँ से अप...
विनय प्रजापति
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ए. एफ़. नज़र, सवाई माधोपुरचूल्हा-चौका फाइल बच्चे दिन भर उलझी रहती हैवह घर में और दफ़तर में अब आधी-आधी रहती हैमिलकर बैठें दुःख सुख बाटें इतना हमको वक़्त कहाँदिन उगने से रात गये तक आपा-धापी रहती हैजिस दिन से तकरार हुई उन स्याह गुलाबी होंठों मेंदो कजरारी आँखों के संग छत...
विजय कुमार सप्पत्ति
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ये जो चाँद है न ,वो रात को निकलता है .....!!वैसे तो चाँद हर रोज निकलता है , पर कभी कभी अमावस आ जाती है ......और इस बार की अमावस अब खत्म नहीं होंगी कभी .....!
विजय राजबली माथुर
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लगभग 12 (अब  32)  वर्ष पूर्व सहारनपुर के 'नया जमाना'के संपादक स्व. कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर'ने अपने एक तार्किक लेख मे 1952 मे सम्पन्न संघ के एक नेता स्व .लिंमये के साथ अपनी वार्ता के हवाले से लिखा था कि,कम्यूनिस्टों और संघियों के बीच सत्ता की निर्णायक ल...
shashi purwar
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ऐ  चाँद ,  तू  मत  दिखा  मुझे   वो   नज़ारे     जिन्हें   मै  पा  नहीं  सकूं  .ऐ  चाँद  , तू   मत   कर  वो  इशारे   ...
 पोस्ट लेवल : छन्दमुक़त चाँद
Ashok kumar
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भूल गया अब ये दिल मेरा ,जो हुआ था गम इसे तेरा ।ढूढ़ता है तुम्हीँ को अब ये ,देखा है जब से चहरा तेरा । आईना आँखोँ का साफ है तेरा ,दिखता है इसमेँ चहरा सिर्फ मेरा ।सितारा कहूँ क्यूँ ? चाँद है तू मेरा ,तू जमीँ नहीँ आसमां है मेरा ।"अंजान" कैद पिँजरे मेँ परिन्दे की तरह ,स...
Ashok kumar
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ना जाने क्या हुआ      जो तूने छू लिया,          शरीर मेँ लहू दौड़ने लगा               कुछ नशा-सा हुआ।। आँखोँ मेँ मेरी झाँककर   &nbs...
Ashok kumar
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ऐ-चाँद बता तू ,   तेरा हाल क्या हैँ ?     किस जुस्तजू मेँ ,       तू फँसा हुआ ?         क्यूँ छाया हुआ           घनघोर अँधेरा ।   ...
 पोस्ट लेवल : चाँद का हाल Kavita
Ashok kumar
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कौन कहता है जमीँ सें,छुआ नहीँ जा सकता आँसमान।नहीँ था जब भूखा,इस तथ्य से था "अंजान";चन्द्रमा भी लगता था मुझे प्रेयसी के समान ।। शिकार को निकला था जंगल मेँ,भूख से था मैँ परेशान।गरिमा से ज्योति बिखेरता चन्द्रमा,लगता था मुझे एक बड़ी रोटी के समान।।www.vishwaharibsr.blogs...
 पोस्ट लेवल : चाँद की ख्वाहिश Kavita
ललित शर्मा
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(१)खुली  खिड़कीउतरी उषा किरणों के साथतुम सोते रहे(२)काठ का चाँदक्या रौशन करेगा?आकाशतुम्हारे लिए  है अमावश  (३)छटती  धुंधटूटता तिलस्मस्तब्ध यामिनी स्तब्ध गगन कोई साक्षी हैआपकाशिल्पकार,  &nbsp...
 पोस्ट लेवल : चाँद शिल्पकार कविता