ब्लॉगसेतु

kuldeep thakur
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सूरज आग का गोला ही सही  गैसों का बवंडर ही सही मगर, पीता है अभी भी अर्ध्य का जल धरती में है कितने कितने चट्टानी रहस्य फिर भी बचा है ,माँ जैसा गुनगुनापन जो ,अंकुरों में भरतादानों में झरता हैं दूध सा अतल में है कहीं तलछोर में अछोर&nb...
मधुलिका पटेल
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तुमने बड़ी खामोशी से लौटाए कदमपर मेरे दिल पर दस्तक हो ही गई मेरे हमदम आते हुए कदमों में एक जोश थालौटता हुआ हर कदम ख़ामोश था वो शिकायतों की गिरह ख़ोल तो देता जो तूने अपने मन में बांधी थीदो लफ़जों में बोल तो देतानासूर जो तूने बिना वजह पालेउसकी दवा मुझस...
सुनील  सजल
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@ युग‘’धन के लिए वह अपमान भी सहने को तैयार हो जाता है |’’‘’क्या बुरा करता है , यह तो क्षणिक है |’’कैसे?’’‘’ यह धना का युग है दोस्त |पास में धन है तो सम्मान स्वत: उसके चरण चूमता है |’’<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<&l...
 पोस्ट लेवल : मांग चाँद युग
Sandhya Sharma
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मेरा चांद समझता हैमेरे चूड़ी, बिछुए, झुमकेपायल की रुनझुन बोलीसुन लेता है, वह सबजो मुझे कहना तो थालेकिन किसीसे ना बोलीपढ़ लेता है मेरीआँखों की भाषाहरपल बिखेरता रहता हैस्नेह की स्निग्ध चाँदनीअमृत बरसाता हैअहसास दिलाता हैजीवन की धुरी हूँ मैंअधूरा है वह मेरे बिनाकभी आध...
मधुलिका पटेल
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सोच रहा हूँ आज अपने गाँव लौट लेगांवों में अब भी कागा मुंडेर पर नज़र आते हैंउनके कांव - कांव से पहुने घर आते हैं पाँए लागू के शब्दों से होता है अभिनंदनआते ही मिल जाता है कुएँ का ठंडा पानी और गुड़ धानीनहीं कोइ सवाल क्यों आए कब जाना है नदी किनारे गले मे...
शिवम् मिश्रा
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प्रिये ब्लॉगर मित्रगण नमस्कार,आज की बुलेटिन में प्रस्तुत है मेरी लिखी नई कहानी....लम्हे इंतज़ार के -----------------------------------------------------------------------ऐ मेरे चंदा - शुभ-रात्री, आज रात मेरे लिए कोई प्रेम भरा गीत गाओ। काली सियाह रात का पर्दा गिर चुक...
सरिता  भाटिया
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खुशियों की सौगात ले,आई है जो ईद बदली से चंदा निकल, सभी करेंगे दीद |राम राम मैं भी कहूँ ,तू भी कह रहमान गले मिलो रोजा करो,आई है रमजान |रोजा उसको तुम कहो ,या कह दो उपवास खुशियों के त्यौहार ही,लाते हैं दिन ख़ास |कर्म मास है कर्म कर, व्रत करो सोमवार ...
भावना  तिवारी
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अमन चाँदपुरी के दस दोहेपथ तेरा खुद ही सखे, हो जाये आसान।यदि अंतर की शक्ति की, तू कर ले पहचान।1।--निश्चित जीवन की दिशा, निश्चित अपनी चाल। सदा मिलेंगे राह में, कठिनाई के जाल।2।-- चिर निद्रा देने उन्हें, आते कृपा-प्रवीण।3।निद्रा लें फुटपाथ पर, जो आवास विहीन। -- गर्मी...
भावना  तिवारी
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पाँच क्षणिकाएँ---(1) 'परिवर्तन'जीवन में परिवर्तन जरूरी होता है उसे उत्कृष्ट बनाने के लिए जैसे, कुछ समय पहले अपनी ही रची हुई कविता में परिवर्तन करना।(2) 'कब्र में'ज़िन्दगी के दरवाजे पर हलचल कर रही है मौत अन्त समय में ठंडक कुछ ज़्यादा ही सता र...
भावना  तिवारी
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"पाँच हाइकु"------- 1. नन्हीं गौरैया कमरे में आते ही पंखे से भिड़ी।2. धान लगाती ढेर सारी गोपियाँ कजरी गाती।3. हार पे हार बहुत निर्लज्ज है फिर तैयार।4. बिखरे बीज धरती खुश हुई मिली संतान।5. बड़ा सुकून कन्धों पर उठाया चार लोगों ने।अमन चाँदपुरी