ब्लॉगसेतु

डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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प्रेम ही जीवन हैकल रात चाँद जब बादलों के पीछे छुपने लगा चांदनी भी घर की दीवारों को छू कर सिमटने लगी  बोझिल हृदय से उसे यूँ घर के दरवाज़े से लौटने का उलहाना दे दियाचन्द्रमा के अस्तित्व में मेरा अस्तित्व हैप्रेम का प्रतीक हैप्रेम ही जीवन हैकह कर चन्द्रमा के साथ च...
मुकेश कुमार
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तकिये को मोड़ करउस पर रख लिया था सरटेबल लैम्प की हलकी मद्धिम रौशनीनजदीक पढने वाले चश्मे के साथगड़ाए था आँख “पाखी” के सम्पादकीय पर !!हाशिये पर हर्फ़समझा रहे थे, प्रेम भरद्वाजउन्हें पागल समझने के लिएहैं हम स्वतंत्रक्योंकि वो करते हैं दिल की बात !!तभी अधखुली खिड़की स...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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हृदय में प्रेम नहीं होमनों में सामंजस्य नहीं होस्वभाव में धैर्य नहीं हो सहनशीलता सोच से पर होकरवा चौथ होतीज त्योंहार होव्रत उपवास रखोपूजा पाठ करो सब व्यर्थ हैपरिणाम भी निश्चित है© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर516-08-12--10-2014त्योंहार,व्रत,उपवास,चाँद,प्रेम,पूजा पाठ...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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आकाश के चाँद को देख कर क्या करूँजब मेरा चाँद हर पल मेरा साथ निभाता है व्रत उपवास रख कर क्या करूँ जब मेरा चाँद अपने हाथों से मुझे खिलाता है हाथों में मेहंदी चेहरे पर श्रृंगार सुन्दर वस्त्रों का क्या करूँ जब मेरा चाँद मुझे हर रूप में चाहता हैइन त्योहारों का क्या करूँ...
गायत्री शर्मा
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- गायत्री शर्माप्रकृति ने विवाहिता के भावों को कुछ ऐसा बनाया है कि उसके हृदय के हर स्पंदन के साथ ‘अमर सुहाग’ की दुआएँ सुनाई पड़ती है। अपने लिए वह किसी से कुछ नहीं माँगती पर ‘उनके’ लिए वह सबसे सबकुछ माँग लेती है। धरती के पेड़-पौधे, देवी-देवताओं के साथ ही ‘करवाचौथ’ क...
Madabhushi Rangraj  Iyengar
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रिश्तों की मिठास करीब 20-25 बरस पहले की बात है. हमारी एक परिचित “भाभीजी” ने मेरे घर की चाबी माँगी. व्यवहार वश मजबूर बिना कोई सवाल किए मैंने चाबी उनके सुपुर्द कर दी. वे बोलीं शाम के ऑफिस से लौटते वक्त घर से चाबी ले जाईएगा. मैंने कहा ठीक है और ऑफिस का रुख कर गया...
 पोस्ट लेवल : भाभीजी करवा चौथ चाँद
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अपने काव्य संकलन सुख का सूरज से"चाँद-सितारे ला सकता हूँ" अपना माना है जब तुमको,चाँद-सितारे ला सकता हूँ । तीखी-फीकी, जली-भुनी सी,सब्जी भी खा सकता हूँ।दर्शन करके चन्द्र-वदन का,निकल पड़ा हूँ राहों पर,बिना इस्तरी के कपड़ों में,दफ्तर भी जा सकता हूँ।गीत और स...
Sandhya Sharma
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यही है वह एकांतवही पेड़ और शाखाएं स्मृतियों की छायाएँ यहीं से उगा थाचाँद प्रीत कायहीं मिले थे पहली बारठीक उसी जगह जा पहुंचे जो जगहें जानी पहचानी थी हमारा स्वागत नहीं करतींफिर क्यों आ जाते हैं यहाँबार-बार  ………!!शायद कोई फ़ागुनी  बयार    &...
गायत्री शर्मा
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चाँद, आसमान में चमकता वो श्वेज ज्योतिपुंज है, जिसके रूप-सौंदर्य के आगे सब कुछ फीका है। कहने को तो नासा के वैज्ञानिक चाँद की उबड़-खाबड़ सतह पर गड्ढ़ों का दावा करते है परंतु इसी गड्ढ़ों वाले चाँद पर प्रेमियों के प्रेम की गाड़ी बेरोकटोक सरपट दौड़ती है। चाँद में कितने...
 पोस्ट लेवल : प्रेम चाँद
Kailash Sharma
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आज नहीं सुननी है मुझकोराजा रानी की नई कहानी।मेरे मन में जो प्रश्न उठे हैं आज उन्हें माँ तुम सुलझा दो।तितली रंग बिरंगी क्यों हैं, इनके पंख कौन है रंगता।उड़ती रहती फूल फूल परमाँ मुझको यह राज बता दो।चाँद कहाँ दिन में जाता है,सूरज कहाँ रात्रि में सोता।दोनों सा...