ब्लॉगसेतु

भावना  तिवारी
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      मेरी एक छोटी सी लाईब्रेरी, जिसमें मुश्किल से पैंतिस-चालिस पुस्तकें ही होगीं और सभी एक से बढ़कर एक। कुछ तो हिन्दी साहित्य की अमूल्य धरोहर और कालजई पुस्तकों में गिनी जाती हैं, एक पुस्तक तो नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित है, और एक साहित्य अ...
भावना  तिवारी
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'बदलता वक्त' परिवर्तित होता जा रहा आज मौसम जाड़ा, गर्मी और बरसात हाय रे ! तीनों भयानक, तीनों निर्मम सह नहीं पाता मेरा बदन एक के गुजरने पर दूसरा बिन बताये शुरू कर देता अपनी चुभन कैसा है ये परिवर्तन क्यों होता है ये परिवर्तन समय बदलता रहता है काल का पहिया चल...
भावना  तिवारी
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मेरे कुछ दोहेतुलसी ने मानस रचा, दिखी राम की पीर।बीजक की हर पंक्ति में, जीवित हुआ कबीर।1।--माँ के छोटे शब्द का, अर्थ बड़ा अनमोल।कौन चुका पाया भला, ममता का है मोल।2।--भक्ति,नीति अरु रीति, की विमल त्रिवेणी होय।कालजयी मानस सरिख , ग्रंथ न दूजा कोय।3।--...
भावना  तिवारी
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मित्रों आज मुझे अमन 'चाँदपुरी' द्वारा भेजी गयी एक लघुकथा प्राप्त हुई।अमन 'चाँदपुरी' एक नवोदित हस्ताक्षर हैं।जिनका परिचय निम्नवत् है-नाम- अमन सिहं जन्मतिथि- 25 नवम्बर 1997 ई. पता- ग्राम व पोस्ट- चाँदपुर तहसील- टांडा जिला-...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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प्रेम ही जीवन हैकल रात चाँद जब बादलों के पीछे छुपने लगा चांदनी भी घर की दीवारों को छू कर सिमटने लगी  बोझिल हृदय से उसे यूँ घर के दरवाज़े से लौटने का उलहाना दे दियाचन्द्रमा के अस्तित्व में मेरा अस्तित्व हैप्रेम का प्रतीक हैप्रेम ही जीवन हैकह कर चन्द्रमा के साथ च...
मुकेश कुमार
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तकिये को मोड़ करउस पर रख लिया था सरटेबल लैम्प की हलकी मद्धिम रौशनीनजदीक पढने वाले चश्मे के साथगड़ाए था आँख “पाखी” के सम्पादकीय पर !!हाशिये पर हर्फ़समझा रहे थे, प्रेम भरद्वाजउन्हें पागल समझने के लिएहैं हम स्वतंत्रक्योंकि वो करते हैं दिल की बात !!तभी अधखुली खिड़की स...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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हृदय में प्रेम नहीं होमनों में सामंजस्य नहीं होस्वभाव में धैर्य नहीं हो सहनशीलता सोच से पर होकरवा चौथ होतीज त्योंहार होव्रत उपवास रखोपूजा पाठ करो सब व्यर्थ हैपरिणाम भी निश्चित है© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर516-08-12--10-2014त्योंहार,व्रत,उपवास,चाँद,प्रेम,पूजा पाठ...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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आकाश के चाँद को देख कर क्या करूँजब मेरा चाँद हर पल मेरा साथ निभाता है व्रत उपवास रख कर क्या करूँ जब मेरा चाँद अपने हाथों से मुझे खिलाता है हाथों में मेहंदी चेहरे पर श्रृंगार सुन्दर वस्त्रों का क्या करूँ जब मेरा चाँद मुझे हर रूप में चाहता हैइन त्योहारों का क्या करूँ...
गायत्री शर्मा
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- गायत्री शर्माप्रकृति ने विवाहिता के भावों को कुछ ऐसा बनाया है कि उसके हृदय के हर स्पंदन के साथ ‘अमर सुहाग’ की दुआएँ सुनाई पड़ती है। अपने लिए वह किसी से कुछ नहीं माँगती पर ‘उनके’ लिए वह सबसे सबकुछ माँग लेती है। धरती के पेड़-पौधे, देवी-देवताओं के साथ ही ‘करवाचौथ’ क...
Madabhushi Rangraj  Iyengar
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रिश्तों की मिठास करीब 20-25 बरस पहले की बात है. हमारी एक परिचित “भाभीजी” ने मेरे घर की चाबी माँगी. व्यवहार वश मजबूर बिना कोई सवाल किए मैंने चाबी उनके सुपुर्द कर दी. वे बोलीं शाम के ऑफिस से लौटते वक्त घर से चाबी ले जाईएगा. मैंने कहा ठीक है और ऑफिस का रुख कर गया...
 पोस्ट लेवल : भाभीजी करवा चौथ चाँद