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sanjiv verma salil
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एक रचना *चाँदनी में नहा चाँदनी महमहा रात-रानी हुई कुछ दीवानी हुई*रातरानी खिलीमोगरे से मिलीहरसिंगारी ग़ज़लसुन गया मन मचलदेख टेसू दहाचाँदनी में नहा*रंग पलाशी चढ़ाकुछ नशा सा बढ़ाबालमा चंपईतक जुही मत मुईछिप फ़साना कहाचाँदनी में नहा*२९-६-२०१६http://divyan...
 पोस्ट लेवल : चांदनी chandani geet गीत
sanjiv verma salil
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एक दोहाजय हो सदा नरेन्द्र की, हो भयभीत सुरेन्द्र. बन न जाये कर साधना, कहीं कभी देवेंद्रमुक्तिकाचाँदनी फसल..संजीव 'सलिल'*इस पूर्णिमा को आसमान में खिला कमल.संभावना की ला रही है चाँदनी फसल..*वो ब्यूटी पार्लर से आयी है, मैं क्या कहूँ?है रूप छटा रूपसी की असल या नक़ल?*दिल...
Sanjay  Grover
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ग़ज़ल ज़िंदगी की जुस्तजू में ज़िंदगी बन जाढूंढ मत अब रोशनी, ख़ुद रोशनी बन जारोशनी में रोशनी का क्या सबब, ऐ दोस्त!जब अंधेरी रात आए, चांदनी बन जागर तक़ल्लुफ़ झूठ हैं तो छोड़ दे इनकोमैंने ये थोड़ी कहा, बेहूदगी बन जाहर तरफ़ चौराहों पे भटका हुआ इंसान-उसको अपनी-सी ल...
Kailash Sharma
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करीने से सज़ी कब ज़िंदगी है,यहां जो भी मिले वह ज़िंदगी है।सदा साथ रहती कब चांदनी है,अँधेरे से सदा अब बंदगी है।हमारी ज़िंदगी कब थी हमारी,पली गैर हाथों यह ज़िंदगी है।नहीं है नज़र आती साफ़ नीयत,जहां देखता हूँ बस गंदगी है।दिखाओगी झूठे सपने कब तक,सजे फिर कब है बिखर ज़िंदगी है।....
दीपक कुमार  भानरे
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रियल लाइफ के अभिनय की ख़त्म कर कहानी ।आसमान के परदे में जा मिली एक और चांदनी ।बेशक हर लम्हे हमें उनकी कमी पड़ेगी सहनी ।कला जगत के लिए यह तो क्षति है अपूरणीय ।अब तो अभिनय के लिये पर्दा होगा आसमानी ।जहां संग होंगे बॉलिवुड के कलाकार रूहानी ।खुदा गवाह है की वे अदाकारा थी...
sanjiv verma salil
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मुक्तक संवेदना का जन्मदिवस नित्य ही मनेदिल से दिल के तार जुड़ें, स्वर्ग भू बनेवेदना तभी मिटे, सौहार्द्र-स्नेह हो-शांति का वितान दस दिशा रहा तने*श्याम घटा बीच चाँद लिये चाँदनीलालिमा से, नीलिमा से सजी चाँदनीसुमन गुच्छ से भी अधिक लिए ताजगी-बिजलियाँ गिरा रही है विह...
Bhavna  Pathak
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बच्चो, यह कहानी है तो बहुत पुरानी पर उतनी ही मजेदार भी है। शायद इसे मेरी दादी को उनकी दादी या नानी ने सुनाया हो। यह भी हो सकता है कि उनकी दादी की दादी को उनकी दादी ने सुनाया हो या मामला और भी पुराना हो। कहानियां तो इसी तरह लंबी यात्रा करती रही हैं। अब आप इसी से अंद...
jaikrishnarai tushar
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चित्र -गूगल से साभार एक गीत -बुन रही होगी शरद की चांदनी बुन रही होगी शरद की चांदनी स्वेटर गुलाबी |दबे पांवों सीढ़ियाँ चढ़ हम छतों पर टहल आयें ,कनखियों से देखकर फिर होठ काटें मुस्कुरायें ,चलो ढूंढें फिर दराजों में पुरा...
मधुलिका पटेल
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वो गर्मी की चांदनी रातें बेवजह की बेमतलब की बातेंकितनी ठंडक थी उन रातों मेंअब भी समाई है कहीं यादों में वो बिछौने और उन पर डले गुलाबी चादर अपने अपने हिस्से  के तारों को गिनने की आदत वो सारे दोस्तों को छत पर हुजूम लगानादेर तक जाग क...
jaikrishnarai tushar
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चित्र -गूगल से साभार एक गीत -चांदनी थी तुम चांदनी थी तुम धुंआ सी हो गयी तस्वीर |मन तुम्हारा पढ़ न पाए असद ,ग़ालिब ,मीर |घोसला तुमने बनाया मैं परिंदों सा उड़ा ,वक्त की पगडंडियों पर जब जहाँ चाहा मुड़ा .और तेरे पांव म...