ब्लॉगसेतु

सतीश सक्सेना
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ये कौम ही मिटी, तो वरदान क्या करेंगे !धूर्तों से मिल रहे ये, अनुदान क्या करेंगे ?चोरों के राज में भी, जीना लिखा के लाये बस्ती के मुकद्दर को ही  जान क्या करेंगे ?आशीष कुबेरों का लेकर, बने हैं हाकिम  लालाओं के बनाये दरबान, क्या करें...
सतीश सक्सेना
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जयकार में उठी कलम,क्या ख़ाक लिखेगीअभिव्यक्ति को वतन में,खतरनाक लिखेगी !अवसाद में निराश कलम , ज्ञान लिखेगी ?मुंह खोल जो कह न सके,चर्वाक लिखेगी ?जिसने किया बरवाद , वे बाहर के नहीं थे !तकलीफ ए क़ौम को भी इत्तिफ़ाक़ लिखेगी !किसने दिया था दर्द, वह बतला न सकेगी !कुछ चाहतें द...
सतीश सक्सेना
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आजकल एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक वृद्ध मां को उसका बेटा निर्दयता पूर्वक जमीन पर घसीटता हुआ ट्रेक्टर के आगे ले जा रहा है ताकि उसे कुचल कर मार सके और यह घटना महाराष्ट्र 21जून की है जहाँ राष्ट्र गौरव की बातें सबसे अधिक की जाती हैं !पिछले कुछ वर्षों में , हमारे...
सतीश सक्सेना
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हे प्रभु ! इस देश में इतने निरक्षर, ढोर क्यों ?जाहिलों को मुग्ध करने को निरंतर शोर क्यों !अनपढ़ गंवारू जान वे मजमा लगाने आ गए ये धूर्त मेरे देश में , इतने बड़े शहज़ोर क्यों ?साधु संतों के मुखौटे पहन कर , व्यापार में   रख स्वदेशी नाम,सन्यासी मु...
सतीश सक्सेना
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हम मुफ्त में सूरज को भी अच्छा नहीं कहते !इस देश में अच्छे को ही,अच्छा नहीं कहते !बच्चों को भूल पर तो माफ़ कर ही दें ,मगर कम उम्र,नर पिशाच को ,बच्चा नहीं कहते !आधार हिल रहा यहाँ  , बचपन से ,नशे में !इस पाशविक प्रवृत्ति को,कच्चा नहीं कहते !उस...
सतीश सक्सेना
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सुनी सुनाई खबरों पर,एतबार बदल लें !झूठी खबरों के सस्ते अखबार बदल लें !चलते, अहंकार की चाल,नज़र आती है !उनसे कहिये,चलने का अंदाज बदल लें !अगर कभी आ जाए ऊँट पहाड़ के नीचे   उंची गर्दन, तुरत झुकाये, चाल बदल ले !तीखी उनकी धार, नहीं दरबार सहेगा !चंवर बादशाही से...
सतीश सक्सेना
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आग लगाई संस्कारों में सारी शिक्षा भुला गुरु कीदाढ़ी तिलक लगाये देखो  महिमा गाते हैं कुबेर की !डर की खेती करते,जीते नफरत फैला,निर्मम गीत !करें दंडवत महलों जाकर,बड़े महत्वाकांक्षी गीत !खद्दर पहने नेतागण अबलेके चलते , भूखे खप्पर,इन पर श्रद्धा कर...
शिवम् मिश्रा
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नमस्कार साथियो, आज कुछ हल्का-फुल्का सा. इधर कुछ दिनों से महसूस हो रहा था कि कुछ लोगों में चापलूसी की जबरदस्त प्रतिभा होती है. बस अवसर मिलते ही उसे बाहर निकालने की देर होती है. इस एक कहानी से आप सब समझ लेंगे. हाँ, इसका सन्दर्भ किसी राजनीति से न लगाने लगिएगा. बस पढ़िए...
सतीश सक्सेना
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भुला पीठसंकल्प कलियुगी आकर्षण में योगी आये,वानप्रस्थ को त्याग,राजसुख लेने वन से,जोगी आये !मरें किसान खेत में कैसे ? ध्यान बटाने को भूखों का, योग सिखाने जोगी बनकर,राजनीति के ढोंगी आये !महंगाई से त्रस्त,भूख बेहाल ग्राम,शमशान बना के,  ध्यान बट...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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चाटुकारिता का धर्म आस्था निष्ठा से चाटुकारिता काधर्म निभाना मनुष्य का स्वभाव बन गया हैअपने से सक्षम के क़दमों में लौटना  सम्मान का पैमाना हो गया हैगुण अवगुण को ताक में रख कर  जिससे भी लाभ की आशा  हो स्वार्थ में अब वही भगवान हो गया है © डा.राजेंद्...