ब्लॉगसेतु

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--आहत वृक्ष कदम्ब का, तकता है आकाश। अपनी शीतल छाँव में, बंशी रहा तलाश।।--माटी जैसी हो वही, देता है आकार।कितने श्रम पात्र को, गढ़ता रोज कुम्हार।।--शब्दों में अपने नहीं, करता कभी कमाल।कच्ची माटी जब मिले, दूँ साँचों में ढाल।।--चिन्तन...
 पोस्ट लेवल : दोहे जब मन में हो चाह
Manav Mehta
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मैंने एक गुल्लक बनाई हुई हैअक्सर तेरे लफ़्ज़ों सेभरता रहा हूँ इसको...तू जब भी मिलती थी मुझसेबात करती थीतो भर जाती थी ये...ख़ुशनुमा, रुआंसे, उदास, तीखेमोहब्बत भरे...हर तरह के लफ्ज़भरे हुए हैं इसमें...अब जबकि मैं,तुझसे बिछड़ कर तन्हा रहता हूँ __निकाल कर इन्हें खर्च...
अनीता सैनी
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अदब से आदमी,आदमी होने का ओहदा, आदमीयत की अदायगी आदमी से  करता,  आदमी इंसानियत का लबादा पहन,  स्वार्थ के अंगोछे में लिपटा इंसान बनना चाहता  |सूर्य के तेज़-सी आभा मुख मंडल पर सजा,  ज्ञान की धारा का प्रारब्धकर्ता कहलाता,&nbs...
अनीता सैनी
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  समय के साथ समेटना पड़ता है वह दौर,   जब हम खिलखिलाकर हँसते हैं, बहलाना होता है उन लम्हों को,  जो उन्मुक्त उड़ान से अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करते हैं,  गठरी में बाँधनी पड़ती है, उस वक़्त धूप-सी बिखरी कुछ गु...
sanjiv verma salil
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गीत:आराम चाहिए...संजीव 'सलिल'*हम भारत के जन-प्रतिनिधि हैंहमको हर आराम चाहिए.....*प्रजातंत्र के बादशाह हम,शाहों में भी शहंशाह हम.दुष्कर्मों से काले चेहरेकरते खुद पर वाह-वाह हम.सेवा तज मेवा के पीछे-दौड़ें, ऊँचा दाम चाहिए.हम भारत के जन-प्रतिनिधि हैंहमको हर आराम चाहिए....
 पोस्ट लेवल : आराम चाहिए... गीत
Yashoda Agrawal
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चम्मापुर नाम का एक नगर था, जिसमें चम्पकेश्वर नाम का राजा राज करता था। उसके सुलोचना नाम की रानी थी और त्रिभुवनसुन्दरी नाम की लड़की। राजकुमारी यथा नाम तथा गुण थी। जब वह बड़ी हुई तो उसका रूप और निखर गया। राजा और रानी को उसके विवाह की चिन्ता हुई। चारों ओर इसकी खबर फैल...
ज्योति  देहलीवाल
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दोस्तों, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि सिर्फ़ सहीं तरीके से, सहीं समय पर और सहीं मात्रा में पानी पीने से हमें कई बिमारियों से निजात मिल सकती हैं! यहां तक कि पाचनतंत्र दुरुस्त हो कर कब्जियत दूर होती हैं, कोलेस्ट्रोल कम होने से हार्ट अटैक का खतरा कम होता हैं, वजन कम ह...
निरंजन  वेलणकर
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डिस्क्लेमर: यह लेख माला कोई भी टेक्निकल गाईड नही है| इसमें मै मेरे रनिंग के अनुभव लिख रहा हूँ| जैसे मै सीखता गया, गलती करता गया, आगे बढता गया, यह सब वैसे ही लिख रहा हूँ| इस लेखन को सिर्फ रनिंग के व्यक्तिगत तौर पर आए हुए अनुभव के तौर पर देखना चाहिए| अगर किसे टेक्निक...
PRABHAT KUMAR
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बस इतनी ही तो चाहत थी कि कोई दीवाल न हो, जो तुम्हें और मुझे अलग कर सके।कोई ऐसी रात न हो,जो तुम्हें और मुझे उस रात की याद से बाहर कर दे,जिस रात हमारी मुलाकात हुई थी।कविता कोई ऐसी न हो जिसे तुम पढ़ न सकोमेरे लिखने से पहले, लिखने के बाद भी,यहां तक कि मेरे अलविदा कह देन...
Akhilesh Karn
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गायक : आरती मुखर्जी एलबम : गंगा घाटगीतकार: राजपतिसंगीतकार :  नदीम श्रवणम्यूजिक कंपनी : सारेगामाचाहे पैंया पड़ चाहे पैंया पड़ चाहे नाक रगड़चाहे पैंया पड़ चाहे नाक रगड़हम ते अंगुरी पे तोहके नचौबे रसियाधीरे से पतरी कमर लचकैबै तओ धीरे से पतरी कमर लचकैबै तधरती...