ब्लॉगसेतु

anup sethi
281
अक्‍तूबर 2016 में छपे चिंतनदिशा पत्रिका के पत्रिका-परिक्रमा स्‍तंभ में पत्रिकाओं और सोशल मीडिया पर मुनि मुक्तकंठ की टिप्‍पणी छपी है। दैनिक समाचार समाचारों को एक दिन बाद रद्दी में बदलता है लेेकिन फेसबुक दैनिक अखबारों से भी ज्‍यादा तेजी से चल...
anup sethi
281
    वरिष्‍ठ कवि चंद्रकांत देवताले जी से मिलने का पहला मौका आकशवाणी इंदौर के एक कार्यक्रम के सिलसिले में मिला जब हम लोग दूरदर्शन के गेस्‍ट हाउस में एक रात ठहरे. उनसे मिल कर बहुत अच्‍छा लगा. वे बहुत सहज हैं और दूसरे व्‍यक्ति को भी पूरी तरह से सहज बना देते...
anup sethi
281
संकट हिंदी कविता नहीं असल में हिंदी आलोचना का हैमुंबई ये प्रकाशित पत्रि‍का चिंतनदिशा में पिछले कुछ अंकों से चल रही बहस को आप यहां पढ़ते आए हैं. पत्रि‍का के  ताजा छपे अंक में इस बहस की अगली कड़ी के रूप में युवा कवि आलोचक अशोक कुमार पांडेय का लेख छपा है.  य...
anup sethi
281
  कुछ समय पहले मुंबई में कहानीकार लखनऊ से हरिचरण प्रकाश और कानपुर से अमरीक सिंह दीप आए हुए थे। कथाकार ओमा शर्मा, आर.के. पालीवाल और हरियश राय मुंबई में हैं ही। कवि विनोद दास भी अब मुंबई में ही हैं। ओमा ने इनसे मिलाने का प्रोग्राम बनाया। 'चिंतन दिशा'  के...
anup sethi
281
        जैसा कि आप जानते हैं, मुंबई से प्रकाशित पत्रि‍का चिंतनदिशा में विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियों के जरिए समकालीन कविता पर बहस शुरू हुई थी. अगले अंकों में इन चिट्ठियों पर विजेंद्र और जीवन सिंह;...
anup sethi
281
जैसा कि आप जानते हैं, मुंबई से प्रकाशित पत्रि‍का चिंतनदिशा में विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियों के जरिए समकालीन कविता पर बहस शुरू हुई थी. अगले अंकों में इन चिट्ठियों पर विजेंद्र और जीवन सिंह; राधेश्‍याम उपाध्‍याय, महेश पुनेठा, सुलतान अहमद...
anup sethi
281
चिंतनदिशा में समकालीन कविता पर विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियां आप पढ़ चुके हैं. फिर अगले अंक में उन चिट्ठियों पर विजेंद्र और जीवन सिंह की प्रतिक्रिया भी पढ़ चुके हैं. चिंतनदिशा के ताजा अंक में राधेश्‍याम उपाध्‍याय, महेश पुनेठा, सुलतान अहमद और मेरी प्रत...
anup sethi
281
    चिंतनदिशा में समकालीन कविता पर विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियां आप पढ़ चुके हैं. फिर अगले अंक में उन चिट्ठियों पर विजेंद्र और जीवन सिंह की प्रतिक्रिया भी पढ़ चुके हैं. चिंतनदिशा के ताजा अंक में राधेश्‍याम उपाध्‍याय, महेश पुनेठा, सुलतान अ...
anup sethi
281
  चिंतनदिशा में समकालीन कविता पर विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियां आप पढ़ चुके हैं. फिर अगले अंक में उन चिट्ठियों पर विजेंद्र और जीवन सिंह की प्रतिक्रिया भी पढ़ चुके हैं. चिंतनदिशा के ताजा अंक में राधेश्‍याम उपाध्‍याय, महेश पुनेठा, सुलतान अहमद और...
anup sethi
281
चिंतनदिशा में समकालीन कविता पर विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियां आप पढ़ चुके हैं. फिर अगले अंक में उन चिट्ठियों पर विजेंद्र और जीवन सिंह की प्रतिक्रिया भी पढ़ चुके हैं. चिंतनदिशा के ताजा अंक में राधेश्‍याम उपाध्‍याय, महेश पुनेठा, सुलतान अहमद और मेरी प...