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sanjiv verma salil
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चित्रगुप्त-रहस्यसंजीव*चित्रगुप्त पर ब्रम्ह हैं, ॐ अनाहद नादयोगी पल-पल ध्यानकर, कर पाते संवादनिराकार पर ब्रम्ह का, बिन आकार न चित्रचित्र गुप्त कहते इन्हें, सकल जीव के मित्रनाद तरंगें संघनित, मिलें आप से आपसूक्ष्म कणों का रूप ले, सकें शून्य में व्यापकण जब गहते भार तो...
 पोस्ट लेवल : चित्रगुप्त-रहस्य
संतोष त्रिवेदी
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चित्रगुप्त बेहद चिंतित नज़र आ रहे थे।बार-बार बहीखाता झाँक रहे थे।चेहरे पर मंदी का असर साफ़ दिख रहा था।भारतवर्ष की सड़कों से आत्माओं की आवक अचानक कम हो गई थी।अभी तक सबसे अधिक आपूर्ति वहीं से हो रही थी।‘ऐसा क्या हुआ कि मौत के सेक्टर में भी मंदी आ गई ? आदमी...
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चित्रगुप्त पूजन क्यों और कैसे?श्री चित्रगुप्त का पूजन कायस्थों में प्रतिदिन प्रातः-संध्या में तथा विशेषकर यम द्वितीया को किया जाता है। कायस्थ उदार प्रवृत्ति के सनातन (जो सदा था, है और रहेगा) धर्मी हैं। उनकी विशेषता सत्य की खोज करना है इसलिए सत्य की तलाश में वे हर ध...
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आरती: हे चित्रगुप्त भगवान्... संजीव वर्मा 'सलिल'*हे चित्रगुप्त भगवान! करूँ गुणगानदया प्रभु कीजै, विनती मोरी सुन लीजै...*जनम-जनम से भटक रहे हम, चमक-दमक में अटक रहे हम.भवसागर में भोगें दुःख, उद्धार हमारा कीजै...*हम है याचक, तुम हो दाता, भक्ति अटल दो भाग्य विधाता.मुक्...
sanjiv verma salil
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सृष्टि का मूल*अगम अनाहद नाद ही, सकल सृष्टि का मूलव्यक्त करें लिख ॐ हम, सत्य कभी मत भूलनिराकार ओंकार का, चित्र न कोई एकचित्र गुप्त कहते जिसे, उसका चित्र हरेकसृष्टि रचे परब्रम्ह वह, पाले विष्णु हरीशनष्ट करे शिव बन 'सलिल', कहते सदा मनीषकंकर-कंकर में रमा, शंका का कर अन...
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भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज का चालीसा इस प्रकार है:दोहासुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश।ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश ।।करो कृपा करिवर वदन, जो सरशुती सहाय।चित्रगुप्त जस विमलयश, वंदन गुरूपद लाय ।।चै0-:जय चित्रगुप्त ज्ञान रत्नाकर । जय...
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नवगीत:संजीव. ग्रंथि श्रेष्ठता की पाले हैं .कुटें-पिटें पर बुद्धिमान हैंलुटे सदा फिर भी महान हैंखाली हाथ नहीं संसाधनमतभेदों का सर वितान हैदो-दो हाथ करें आपस मेंजाने क्या गड़बड़झाले हैं?.बातें बड़ी-बड़ी करते हैंमनमानी का पथ वरते हैंबना तोड़ते संविधान खुददोष...
sanjiv verma salil
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दोहे*सकल सृष्टि कायस्थ है, सबसे करिए प्रेम कंकर में शंकर बसे, करते सबकी क्षेम*चित्र गुप्त है शौर्य का, चित्रगुप्त-वरदान काया स्थित अंश ही, होता जीव सुजान*महिमा की महिमा अमित, श्री वास्तव में खूब वर्मा संरक्षण करे,  रहे वीरता डूब*मित्र...
sanjiv verma salil
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चित्रगुप्त वंदना: १धन-धन भाग हमारे*धन-धन भाग हमारे, प्रभु द्वार पधारे। शरणागत को ट्रेन, प्रभु द्वार पधारे....* माटी तन, चंचल अंतर्मन,पारस हो प्रभु कर दो कंचन।जनगण-प्राण पुकारे,प्रभु द्वार पधारे....* प्रीत की रीत सदैव निभाई,लाज भगत की दौड़ बचाई।कब...
 पोस्ट लेवल : चित्रगुप्त chitragupta
शिवम् मिश्रा
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सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।आप सभी को ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से भाई दूज और श्री चित्रगुप्त पूजा की हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाएँ।।~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~क्या महिलाओं का कोई धर्म नहीं है!हमेशा खुश रहना बेटे !रोमांचक सफर पर ले ज...