विश्वास के हल्के झोंके से  पगी मानव मन की अंतरचेतना छद्म-विचार को खुले मन से धारणकर स्वीकारने लगी, हया की पतली परत  सूख चुकी धरा के सुन्दर धरातल पर जिजीविषा पर तीक्ष्ण धूप बरसने लगी | अंतरमन में उलीचती स्नेह सर...