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sanjiv verma salil
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गीत  -भुन्सारे चिरैया  *नई आई,बब्बा! नई आईभुन्सारे चरैया नई आई*पीपर पै बैठत थी, काट दओ कैंने?काट दओ कैंने? रे काट दओ कैंने?डारी नें पाई तो भरमाईभुन्सारे चरैया नई आईनई आई,सैयां! नई आई*टला में पीयत ती, घूँट-घूँट पानीघूँट-घूँट पानी रे घूँट-घूँट पानीटला...
sanjiv verma salil
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एक रचना -भुन्सारे चिरैया*नई आई,बब्बा! नई आईभुन्सारे चरैया नई आई*पीपर पै बैठत थी, काट दओ कैंने?काट दओ कैंने? रे काट दओ कैंने?डारी नें पाई तो भरमाईभुन्सारे चरैया नई आईनई आई,सैयां! नई आई*टला में पीयत ती, घूँट-घूँट पानीघूँट-घूँट पानी रे घूँट-घूँट पानीटला खों पूरो तो रि...
मुकेश कुमार
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हम्म हम्म !इको करती, गुंजायमान हमिंग बर्ड के तेज फडफडाते बहुत छोटे छोटे पर  !फैलाए पंख सूरज को ताकती सुर्ख चोंच तो, कभी फूलों के रंगीन पंखुड़ियों के बीच ढूँढती पराग कण !!सूर्योदय की हरीतिमा बता रही अभी तो बस हुई ही है सुब...
मुकेश कुमार
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क्लिक क्लिक क्लिक!कैमरे के शटर का क्लिकतीन अलग अलग क्षणसहज समेटे हुए परिदृश्य !पहली तस्वीरपूर्णतया प्राकृतिक व नैसर्गिककल कल करती जलधाराचहचहाती चिरैया, फुदकती गोरैयादूर तक दिखती हरियालीडूबता दमकता गुलाबी सूरजपैनोरमा मोड़ मेंखिंची गयी कैमरे की क्लिक !!दूसरा था कोलाजए...
अरुण कुमार निगम
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काऊ माऊ काऊ माऊउड़ी चिरैया फुर्र रे. दादा जी के सुन खर्राटेघुर घुर घुर घुर घुर्र रेकाऊ माऊ काऊ माऊउड़ी चिरैया फुर्र रे.घर में है नन्हा –सा टॉमीपूँछ हिला कर करे सलामीआये कोई अनजाना तोकरता गुर गुर गुर्र रे.काऊ माऊ काऊ माऊउड़ी चिरैया फुर्र रे. तपत कुरू कहता है मिट्...
Sandhya Sharma
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बड़ी मुश्किल से रात कटती कब सुबह हो और उसे मिलूं भुनसारे की चिरैया के जागते ही जग जाती थी वो पता नहीं क्यों बहुत भाता था संग उसका सिर्फ बरसात के दिनों में ही मिलती थी उसका छोटी - छोटी साड़ी पहनना    और उसका वह खास खिलौना ईंट बनाने का सांचा उसकी मोटर गा...