ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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 देख रहा है सारा आलम खेतों में सरसों फूली हैवो देखो ओस से भीगे शजर की शाख़ पर नन्ही चिड़िया झूली है न परेड की चिंता न समिति की फ़िक्रअसहमत हो गई सत्ता से आज गाजर-मूली है भरोसा खोकर ढोते रहो ख़ुद को कंधों पर लज्जाहीन समझ अब देर तक राह भूली है। © रवीन...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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पसीने से लथपथ बूढ़ा लकड़हारा पेड़ काट रहा है शजर की शाख़ पर तार-तार होता अपना नशेमन अपलक छलछलाई आँखों से निहार रही हैएक गौरैया अंतिम तिनका छिन्न-भिन्न होकर गिरने तक किसी चमत्कार की प्रतीक्षा में विकट चहचहाती रही न संगी...
sanjiv verma salil
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बाल गीत : चिड़िया*चहक रही चंपा पर चिड़िया शुभ प्रभात कहती है आनंदित हो झूम रही है हवा मंद बहती है कहती: 'बच्चों!पानी सींचो,पौधे लगा-बचाओबन जाएँ जब वृक्ष छाँह में उनकी खेल रचाओ तुम्हें सुनाऊँगी मैं गाकर लोरी,...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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चिड़िया को जब देखता हूँ तब स्वतंत्रता का अनायास स्मरण हो आता हैजब चाहे उड़ सकती है जहाँ चाहे जा सकती है जब चाहे धूल में नृत्य कर सकती है अथवा पानी में नहा सकती है मनचाहा गीत गा सकती मुक्ताकाश में व...
अनीता सैनी
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उसकी पीड़ा कोजब भी सहलाया मैंनेआँखों में साहस को और बलवती पाया मैंने। निर्मल पौधा क्षमादान का संजीदगी से सींचती आयी।  छिपा रहस्य इंसानियत कासंवेदना से निखरा पाया।  स्थूल जिव्हा मर्मान्तक कीशब्दजाल का न प्रभाव गढ़ापूछ रहा प्रिये पीड़ा मन क...
 पोस्ट लेवल : एक चिड़िया की व्यथा
jaikrishnarai tushar
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भारत का गौरव भारतीय वायुसेना एक देशगान -चिड़िया आँधी के आमंत्रण का कब गीत सुनाती है मजहब नहीं राष्ट्र से ऊपर  प्यारे हिन्दुस्तान है |यह सोने कीमिट्टी इसमेंवीरों का बलिदान है ।अपनी कला -संस्कृति ,कुछ को गाथा नहीं लुभाती है ,चिड़...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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फ़ासले क़ुर्बतों में बदलेंगे एक रोज़, होने नहीं देंगे हम इंसानियत को ज़मी-दोज़। फ़ासले पैदा करना तो सियासत की रिवायत है,अदब को आज तक अपनी ज़ुबाँ की आदत है। आग बाहर तो दिखती है अंदर भी&nbs...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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निर्माण नशेमन का नित करती वह नन्हीं चिड़िया ज़िद करती तिनके अब बहुत दूर-दूर मिलते मोहब्बत के नक़्श-ए-क़दम नहीं मिलतेख़ामोशियों में डूबी चिड़िया उदास नहीं दरिया-ए-ग़म का किनारा भी पास नहीं दिल में ख़लिश ता-उम्र सब्...
Yashoda Agrawal
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परों का कोई संबंध नहीं होताउड़ान के साथउड़ान तो भरी जाती हैहौसले के दम परपर तो कुतर देती है दुनियाघर बन जाते हैं पिंजरादरिंदे भी फैलाए रखते हैं जालमगर हौसले के दम परनभ छू ही लेती हैं लड़कियाँक्योंकि लड़कियाँ चिड़ियाँ नहीं होतीलड़कियाँ तो होती है लड़कियाँ !!लेखक परिचय...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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चिड़िया और इंसानहैं सदियों पुराने मित्र,सभ्यता के सफ़र मेंचिड़िया वही इंसान विचित्र।छोटी-सी ज़िंदगानी मेंचिड़िया अपने बच्चों कोसिखाती है ढेरों उपाय, बाज़, उल्लू, बिल्ली, साँप-सेशिकारियों से बचाव।दूर क्षितिज तक उड़नापानी-धूल में नहानादाना चुगना बना...