ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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गाँव की चौपाल पर अलाव सामयिक चर्चा का फैलाव बिषयों का तीव्र बहाव मुद्दों पर सहमति-बिलगाव। बुज़ुर्ग दद्दू और पोते के बीच संवाद -दद्दू : *****मुहल्ले से        रमुआ ***** को बुला  लइओ ,        ...
ललित शर्मा
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हर्षवर्धन त्रिपाठी
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नानाजी देशमुख की आज पुण्यतिथि है। पहली बार हमें भी चित्रकूट में उनका खड़ा किया काम देखने को मिला। 2 दिन रहते समझ आया कि नानाजी को संघ अगर राष्ट्रऋषि कहता है तो वो सर्वथा उपयुक्त है। नानाजी ने जो किया वो देश के किसी सर्वोच्च राजनेता ने भी शायद नहीं किया है। विधायक,...
Kailash Sharma
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भूल गयी गौरैया आँगन,मूक हुए हैं कोयल के स्वर,ठूठ हुआ आँगन का बरगद,नहीं बनाता अब कोई घर।लगती नहीं न अब चौपालें,शोर नहीं बच्चों का होता।झूलों को अब डाल तरसतीं,सावन भी अब सूना होता।पगडंडी सुनसान पडी है,नहीं शहर से कोई आता।कैसी यह मनहूस डगर है,नहीं लौटता जो भी जाता।&nb...
हर्षवर्धन त्रिपाठी
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साभार- स्पन्दन फीचर्ससंघ प्रमुख डा. मोहनराव भागवत की उपस्थिति में ग्रामोदय और विकास की अवधारणा पर होगा मंथन24 से 27 फरवरी तक चित्रकूट में ज़ुटेंगे संघ, सरकार और मीडिया के दिग्गजगोवा की महामहिम राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा, गुजरात और मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल...
हर्षवर्धन त्रिपाठी
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पांचवां मीडिया चौपाल 22,23 अक्टूबर को हरिद्वार में हो रहा है। संयोगवश सभी मीडिया चौपाल में शामिल होने का अवसर मिला है। पिछले वर्ष ग्वालियर के मीडिया चौपाल में भेड़ियाधंसान ज्यादा होने से चौपालियों में थोड़ा उत्साह कम सा होता दिख रहा था। और ग्वालियर की चौपाल से लौटन...
हर्षवर्धन त्रिपाठी
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एक बार फिर से चौपाली जुटे। इस बार जुटान की जगह रही ग्वालियर। जुटान की जगह भर बदली है। इस बार भी चौपालियों को जुटाने वाले अनिल सौमित्र ही रहे। उन्होंने बीड़ा उठा रखा है। और भोपाल से दिल्ली से ग्वालियर पहुंची चौपाल में इस बार भी दिल्ली की ही तरह चर्चा का मुख्य बिंदु...
Sandhya Sharma
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नदियाँ प्राकृतिक संपदा ही नहीं, जनमानस की भावनात्मक आस्था का आधार होने के साथ-साथ सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सम्पूर्ण मानवता व सभ्यता का अस्तित्व  नदियों के अस्तित्व पर ही है। नदियां या तो मृतप्राय हो चुकी हैं य...
संगीता पुरी
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नई दिल्ली। 'नद्द: रक्षति रक्षितः' विषय के साथ इस बार का आयोजन दिल्ली में भारतीय जनसंचार संस्थान संस्थान (आईआईएमसी) के सभागार में 11 और 12 अक्टूबर को होगा। इसमें देशभर के मीडिया, नदी और जल से जुड़े संगठनों के 250 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। जन सरोकार से जुड़...
Lokendra Singh
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 स ब जानते हैं कि नदियों के किनारे ही अनेक मानव सभ्यताओं का जन्म और विकास हुआ है। नदी तमाम मानव संस्कृतियों की जननी है। प्रकृति की गोद में रहने वाले हमारे पुरखे नदी-जल की अहमियत समझते थे। निश्चित ही यही कारण रहा होगा कि उन्होंने नदियों की महिमा में ग्रंथों तक...