ब्लॉगसेतु

ऋता शेखर 'मधु'
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दोहा गीतिकारंग बिरंगे पुष्प हैं, बगिया के आधार।मिलजुल कर मानव रहें, सुन्दर हो संसार।।तरह तरह की बोलियाँ, तरह तरह के लोग।मन सबका है एक सा, सुखद यही है सार।।मंदिर में हैं घण्टियाँ, पड़ता कहीं अजान।धर्म मज़हब कभी कहाँ, बना यहाँ दीवार।।दान पुण्य  से है धनी, अपना भार...
 पोस्ट लेवल : गीतिका छंद दोहा
sanjiv verma salil
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 ककुभ / कुकुभसंजीव*(छंद विधान: १६ - १४, पदांत में २ गुरु)*यति रख सोलह-चौदह पर कवि, दो गुरु आखिर में भायाककुभ छंद मात्रात्मक द्विपदिक, नाम छंद ने शुभ पाया*देश-भक्ति की दिव्य विरासत, भूले मौज करें नेताबीच धार मल्लाह छेदकर, नौका खुदी डुबा देता*आशिको-माशूक के किस्...
 पोस्ट लेवल : कुकुभ छंद ककुभ ककुभ
Basudeo Agarwal
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(मुक्तक शैली की रचना)अर्थव्यवस्था चौपट कर दी, भ्रष्टाचारी सेठों ने।छीन निवाला दीन दुखी का, बड़ी तौंद की सेठों ने।केवल अपना ही घर भरते, घर खाली कर दूजों का।राज तंत्र को बस में कर के, सत्ता भोगी सेठों ने।।कच्चा पक्का खूब करे ये, लूट मचाई सेठों ने।काली खूब कमाई करके, भ...
Basudeo Agarwal
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पूजा प्रथम गणेश की, संकट देती टाल।रिद्धि सिद्धि के नाथ ये, गज का इनका भाल।गज का इनका भाल, पेट है लम्बा जिनका।काया बड़ी विशाल, मूष है वाहन इनका।विघ्न करे सब दूर, कौन ऐसा है दूजा।भाद्र शुक्ल की चौथ, करो गणपति की पूजा।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया05-09-2016
Basudeo Agarwal
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बहर :- 122*3+ 12 (शक्ति छंद आधारित)(पदांत 'रोटियाँ', समांत 'एं')लगे ऐंठने आँत जब भूख से,क्षुधा शांत तब ये करें रोटियाँ।।लखे बाट सब ही विकल हो बड़े, तवे पे न जब तक पकें रोटियाँ।।तुम्हारे लिए पाप होतें सभी, तुम्हारी कमी ना सहन हो कभी।रहे म्लान मुख थाल में तु...
Basudeo Agarwal
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फटाहाल दिखला ये अपना, करुण कहानी किसे बताते।टपका कर आँखों से  मोती, अन्तः वाणी किसे सुनाते।सूखे अधरों की पपड़ी से, अंतर्ज्वाला किसे दिखाते।अपलक नेत्रों की भाषा के, मौन निमन्त्रण किसे बुलाते।।1।।रुक रुक कर ये प्यासी आँखें, देख रही हैं किसकी राहें।बींधे मन के दुख...
Basudeo Agarwal
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बहर:- 22  121 22,  22  121 22(पदांत का लोप, समांत 'आरी')ममता की जो है मूरत, समता की जो है सूरत,वरदान है धरा पर, ये बेटियाँ हमारी।।माँ बाप को रिझाके, ससुराल को सजाये,दो दो घरों को जोड़े, ये बेटियाँ दुलारी।।जो त्याग और तप की, प्रतिमूर्ति बन के सोहे,निस्...
sanjiv verma salil
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http://divyanarmada.blogspot.in/
sanjiv verma salil
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छंद सलिलारूपमाला२४ मात्रिक अवतारी जातीय छंद *पदभार २४, यति १४-१०, पदांत गुरु लघु।विविध गणों का प्रयोग कर कई मापनियाँ बनाई जा सकती हैं। उदाहरण१ रूपमाला फेरता ले, भूप जैसा भाग।राग से अनुराग करता, भोग दाहक आग।।त्यागता वैराग हँसकर, जगत पूजे किंतु-त्याग द...
भावना  तिवारी
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शम्भो कैलाशवासी, सकल दुखित की, पूर्ण आशा करें वे।भूतों के नाथ न्यारे, भव-भय-दुख को, शीघ्र सारा हरें वे।।बाघों की चर्म धारें, कर महँ डमरू, कंठ में नाग साजें।शाक्षात् हैं रुद्र रूपी, मदन-मद मथे, ध्यान में वे बिराजें।।गौरा वामे बिठाये, वृषभ चढ़ चलें, आप ऐसे दुलारे।माथे...
 पोस्ट लेवल : स्रग्धरा छंद