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sanjiv verma salil
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छंद सलिला:मनमोहन छंदसंजीव*लक्षण: जाति मानव, प्रति चरण मात्रा १४ मात्रा, यति ८-६, चरणांत लघु लघु लघु (नगण) होता है.लक्षण छंद:रासविहारी, कमलनयनअष्ट-षष्ठ यति, छंद रतनअंत धरे लघु तीन कदमनतमस्तक बलि, मिटे भरम.उदाहरण:१. हे गोपालक!, हे गिरिधर!!हे जसुदासुत!, हे नटवर!!हरो म...
Basudeo Agarwal
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बहर 1222 1222 1222 1222नया आया है संवत्सर, करें स्वागत सभी मिल के;नये सपने नये अवसर, नया ये वर्ष लाया है।करें सम्मान इसका हम, नई आशा बसा मन में;नई उम्मीद ले कर के, नया ये साल आया है।लगी संवत् सत्ततर की, चलाया उसको नृप विक्रम;सुहाना शुक्ल पखवाड़ा, महीना चैत्र तिथि एक...
sanjiv verma salil
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त्रिभंगी छंद:संजीव 'सलिल'*ऋतु फागुन आये, मस्ती लाये, हर मन भाये, यह मौसम।अमुआ बौराये, महुआ भाये, टेसू गाये, को मो सम।।होलिका जलायें, फागें गायें, विधि-हर शारद-रमा मगन-बौरा सँग गौरा, भूँजें होरा, डमरू बाजे, डिम डिम डम।।२१.३.२०१३ *http://divyanarmada.blogspot.in...
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 विषय भोर विधा चौपाई छंद भोर भई पनघट पर जाओ जल में गगरी सदा डुबाओ अधजल गगरी छलकत जाती गोरी आधी घर पहुँचातीसखियाँ करती हँसी ठिठोलीखेल रही बनकर हमजोली देखो नाच रही है राधा खुश होकर दुख होता आधा सूर्य देवता भी आते हैं ...
sanjiv verma salil
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छंद सलिला:भव छंदसंजीव* लक्षण: जाति रौद्र, पद २, चरण ४, प्रति चरण मात्रा ११, चरणान्त लघु गुरु गुरु या गुरुलक्षण छंद:एकादश पग रखो, भवसिंधु पार करोचरण आदि मन चाहा, चरण अंत गुरु से होउदाहरण:१. आशा का बीज बो, कोशिश से फसल लोश्रम सीकर नर्मदा, भव तारें वर्मदा२. सूर्य चन्द...
 पोस्ट लेवल : भव छंद
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विषय  सरस्वती वंदना विधा  चौपाई छंदआज बसंत दिवस है आया बाग फूल बूटा इतराया तितली ने भी पँख फैलाए काले भँवरे भी उड़ आएसूरज जब नभ में आएंगे धरा  पे किरणें बिखराएंगेहोगी चारों ओर खुशाली फूल तोड़ने आए माली सरस्वती की कर...
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विधा- छंदविषय- नारी नारी आज करती है,जगत के काम सभी ।नौकरी वो करती है,रख स्वाभिमान को।बेटियों को विदा करें,पाल पोस बड़ा करे।सौंपती है वर जी को,कर कन्यादान कों।बड़ों की वो करे सेवा,पूजा से लुभाती देवा।कर अच्छे काम को तो, पाती वरदान वो। अतिथि को मान देत...
Basudeo Agarwal
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फागुन का मास।रसिकों की आस।।बासंती वास।लगती है खास।।होली का रंग।बाजै मृदु चंग।।घुटती है भंग।यारों का संग।।त्यज मन का मैल।टोली के गैल।।होली लो खेल।ये सुख की बेल।।पावन त्योहार।रंगों की धार।।सुख की बौछार।दे खुशी अपार।।=============निधि छंद विधान:-यह नौ मात्रिक चार चरणो...
Basudeo Agarwal
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सभी हम दीन।निहायत हीन।।हुए असहाय।नहीं कुछ भाय।।गरीब अमीर।नदी द्वय तीर।।न आपस प्रीत।यही जग रीत।।नहीं सरकार।रही भरतार।।अतीव हताश।दिखे न प्रकाश।।झुकाय निगाह।भरें बस आह।।सहें सब मौन।सुने वह कौन।।सभी दिलदार।हरें कुछ भार।।कृपा कर आज।दिला कछु काज।।मिला कर हाथ।चलें सब साथ।...
Basudeo Agarwal
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चले चलो पथिक।बिना थके रथिक।।थमे नहीं चरण।भले हुवे मरण।।सुहावना सफर।लुभावनी डगर।।बढ़ा मिलाप चल।सदैव हो अटल।।रहो सदा सजग।उठा विचार पग।।तुझे लगे न डर।रहो न मौन धर।।प्रसस्त है गगन।उड़ो महान बन।।समृद्ध हो वतन।रखो यही लगन।।=============लक्षण छंद:-"जभाग" वर्ण धर।सु'शारदी' म...