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भावना  तिवारी
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कौन समय को रख सकता है, अपनी मुट्ठी में कर बंद।समय-धार नित बहती रहती, कभी न ये पड़ती है मंद।।साथ समय के चलना सीखें, मिला सभी से अपना हाथ।ढल जातें जो समय देख के, देता समय उन्हीं का साथ।।काल-चक्र बलवान बड़ा है, उस पर टिकी हुई ये सृष्टि।नियत समय पर फसलें उगती, और बादलों...
 पोस्ट लेवल : आल्हा छंद Basudeo Agarwal
Basudeo Agarwal
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पर्यावरण खराब हुआ, यह नहिं संयोग।मानव का खुद का ही है, निर्मित ये रोग।।अंधाधुंध विकास नहीं, आया है रास।शुद्ध हवा, जल का इससे, होय रहा ह्रास।।यंत्र-धूम्र विकराल हुआ, छाया चहुँ ओर।बढ़ते जाते वाहन का, फैल रहा शोर।।जनसंख्या विस्फोटक अब, धर ली है रूप।मानव खुद गिरने खातिर...
Basudeo Agarwal
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दस्यु राज रत्नाकर जग में, वाल्मीकि कहलाये।उल्टा नाम राम का इनको, नारद जी जपवाये।।मरा मरा से राम राम की, सुंदर धुन जब आई।वाल्मीकि जी ने ब्रह्मा सी, प्रभुताई तब पाई।।घोर तपस्या में ये भूले, तन की सुध ही सारी।चींटे इनके तन से चिपटे, त्वचा पूर्ण खा डारी।।प्रणय समाहित क...
Basudeo Agarwal
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सार छंद चार चरणों का समपाद मात्रिक छंद है। प्रति चरण 28 मात्रा होती है। यति 16 और 12 मात्रा पर है। दो दो चरण तुकान्त। मात्रा बाँट-16 मात्रिक ठीक चौपाई वाला चरण और 12 मात्रा वाला में तीन चौकल अथवा एक अठकल और एक चौकल हो सकते हैं। 12 मात्रिक पद का   अंत गुरु...
Basudeo Agarwal
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भंभौरा में जन्म लिया है, यू पी का यक गाँव।रामबदन खेतीहर के घर, अपने रक्खे पाँव।।सन इक्यावन की शुभ बेला, गुजरातीजी मात।राजनाथजी जन्म लिये जब, सबके पुलके गात।।पाँव पालने में दिखलाये, होनहार ये पूत।थे किशोर तेरह के जब ये, बने शांति के दूत।।जुड़ा संघ से कर्मवीर ये, आगे...
Basudeo Agarwal
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हर नगर है बदहाल।अब जरा देख न भाल।।है व्यवस्था लाचार।दिख रही चुप सरकार।।वाहन खड़े यक ओर।पशु सड़क बीच विभोर।।कुछ बची शर्म न लाज।हर तरफ जंगल राज।।मन मौज में कुछ लोग।हर चीज का उपयोग।।वे करे निज अनुसार।बन कर सभी पर भार।।ये दौड़ अंधी आज।जा रही दब आवाज।।आराजकों का शोर।बस अब...
sanjiv verma salil
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छंद पञ्चचामर विधान - जरजरजग मापनी - १२१ २१२ १२१ २१२ १२१ २ *कहो-कहो कहाँ चलीं, न रूठना कभी लली न बोल बोल भूलना, कहा सही तुम्हीं बली न मोहना दिखा अदा, न घूमना गली-गली न दूर जा न पास आ, सुवास दे सदा कली *http://divyanarmada.blogspot.in/
Basudeo Agarwal
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चंदा चित्त चुरावत है।नैना नीर बहावत है।।प्यासी प्रीत अतृप्त दहे।प्यारा प्रीतम दूर रहे।।ये भृंगी मन गूँजत है।रो रो पीड़ सुनावत है।।माला नित्य जपूँ पिय की।भूली मैं सुध ही जिय की।।रातें काट न मैं सकती।तारों को नभ में तकती।।बारंबार फटे छतिया।है ये व्याकुल बावरिया।।आँसू...
Basudeo Agarwal
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मन तो ठहर ठहर अब, सकपकाये।पिय की डगर निरख दृग, झकपकाये।।तुम क्यों अगन सजन यह, तन लगाई।यह चाह हृदय मँह प्रिय, तुम जगाई।।तुम आ कर नित किस विध, गुदगुदाते।सब याद सजन फिर हम, बुदबुदाते।।अब चाहत पुनि चित-चक, चहचहाना।नित दूर न रह प्रियवर, कर बहाना।।दहके विरह अगन सह, हृदय...
ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठे - हिन्दी पखवारा विशेष छंदमेरा हिन्दुस्तान, जग में बहुत महान है।हिन्दी इसकी जान, मिठास ही पहचान है।।व्यक्त हुए हैं भाव, देवनागरी में मधुर।होता खास जुड़ाव, कविता जब सज कर मिली।।कोमलता से पूर्ण, अपनी हिन्दी है भली।छोटे बड़े अपूर्ण, ऐसे तो न भेद करे।।होता है व्याया...