ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
0
सॉनेटसदा सुहागिन•खिलती-हँसती सदा सुहागिन।प्रिय-बाहों में रहे चहकती।वर्षा-गर्मी हँसकर सहती।।करे मकां-घर सदा सुहागिन।।गमला; क्यारी या वन-उपवन।जड़ें जमा ले, नहीं भटकती।बाधाओं से नहीं अटकती।।कहीं न होती किंचित उन्मन।।दूर व्याधियाँ अगिन भगाती।अपनों को संबल दे-पाती।जीवट क...
sanjiv verma salil
0
त्रिभंगी सलिला:हम हैं अभियंतासंजीव*(छंद विधान: १० ८ ८ ६ = ३२ x ४)*हम हैं अभियंता नीति नियंता, अपना देश सँवारेंगेहर संकट हर हर मंज़िल वर, सबका भाग्य निखारेंगेपथ की बाधाएँ दूर हटाएँ, खुद को सब पर वारेंगेभारत माँ पावन जन मन भावन, श्रम-सीकर चरण पखारेंगे*अभियंता मिलकर आग...
sanjiv verma salil
0
ॐ छंद सलिला: त्रिभंगी छंद संजीव * छंद-लक्षण: जाति लाक्षणिक, प्रति चरण मात्रा ३२ मात्रा, यति १०-८-८-६, पदांत गुरु, चौकल में पयोधर (लघु गुरु लघु / जगण) निषेध। लक्षण छंद: रच छंद त्रिभंगी / रस अनुषंगी / जन-मन संगी / कलम सदा दस आठ आठ छह / यति गति मति सह / गुरु पदांत...