छंद सप्तक १. *शुभगति कुछ तो कहो चुप मत रहो करवट बदल- दुःख मत सहो *छवि बन मनु महान कर नित्य दान तू हो न हीन- निज यश बखान*गंग मत भूल जाना वादा निभानासीकर बहाना गंगा नहाना *दोहा:उषा गाल पर मल रहा, सूर्य विहँस सिंदूर।कहे न तुझसे अधिक है, सुंदर कोई हूर।।*सोरठासलिल...