ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
262
करके तांडव नृत्य, प्रलय जग की शिव करते।विपदाएँ भव-ताप, भक्त जन का भी हरते।देवों के भी देव, सदा रीझें थोड़े में।करें हृदय नित वास, शैलजा सँग जोड़े में।प्रभु का निवास कैलाश में, औघड़ दानी आप हैं।भज ले मनुष्य जो आप को, कटते भव के पाप हैं।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया22...
Basudeo Agarwal
262
अग्रसेन नृपराज, सूर्यवंशी अवतारी।विप्र धेनु सुर संत, सभी के थे हितकारी।द्वापर का जब अंत, धरा पर हुआ अवतरण।भागमती प्रिय मात, पिता वल्लभ के भूषण।नागवंश की माधवी, इन्हें स्वयंवर में वरी।अग्रोहा तब नव बसा, झोली माँ लक्ष्मी भरी।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया20-04-18
Basudeo Agarwal
262
छप्पय एक अर्द्ध सममात्रिक छंद है। यह भी कुंडलिया छंद की तरह छह चरणों का एक मिश्रित छंद है जो दो छंदों के संयोग से बनता है। इसके प्रथम चार चरण रोला छंद के, जिसके प्रत्येक चरण में 24-24 मात्राएँ होती हैं तथा यति 11-13 पर होती है। आखिर के दो चरण उल्लाला छंद के होते है...