ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन फत्ते, एक रहिन हम.ईर ने कहा चलो शिकार कर आबें,बीर ने कहा चलो शिकार कर आबें,फत्ते बोले चलो शिकार कर आबें,हमऊँ बोले हाँ चलो शिकार कर आबें. ईर ने मारी एक चिरैया,बीर ने मारी दो चिरैयाँ,फत्ते मारे तीन चिरैयाँ,और हम???? हम मारे एक चुखरिया...
kumarendra singh sengar
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कुछ लोग नमस्कार करते समय अपनी गर्दन, सिर को इतना ही हिलाते हैं कि बस उसके मन को मालूम चलता है कि नमस्कार की गई। बेचारी गर्दन और बेचारे सिर को तो पता ही नहीं चल पाता कि उनके मालिक ने किसी को नमस्कार करने में उनका दुरुपयोग कर लिया।जिसको नमस्कार की गई उसकी जानकारी की...
kumarendra singh sengar
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लॉकडाउन में कहीं आना-जाना तो हो नहीं रहा है सो दिन-रात मोबाइल, लैपटॉप की आफत बनी हुई है. शुरू के कुछ दिन तो बड़े मजे से कटे उसके बाद इन यंत्रों के सहारे दूसरे लोग हमारी आफत करने पर उतारू हो गए. सुबह से लेकर देर रात तक मोबाइल की टुन्न-टुन्न होती ही रहती है मैसेज के आ...
kumarendra singh sengar
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लॉकडाउन में कहीं आना-जाना तो हो नहीं रहा है सो दिन-रात मोबाइल, लैपटॉप की आफत बनी हुई है. शुरू के कुछ दिन तो बड़े मजे से कटे उसके बाद इन यंत्रों के सहारे दूसरे लोग हमारी आफत करने पर उतारू हो गए. सुबह से लेकर देर रात तक मोबाइल की टुन्न-टुन्न होती ही रहती है मैसेज के आ...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
kumarendra singh sengar
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चीनी उत्पादों के जैसे इसकी तासीर न निकली. जैसे सारे चीनी उत्पाद सुबह से लेकर शाम तक वाली स्थिति में रहते हैं ठीक उसी तरह से इस कोरोना वायरस को समझा गया था. हर बार की तरह इस बार भी चीन को समझने में ग़लती हुई और कोरोना हम सबके गले पड़ गया. कोरोना का इधर गले पड़ना हुआ उध...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
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आँख खुलते ही श्रीमती जी को चाय के लिए आवाज़ लगाई. सुबह से तीसरी बार आँख खुली है. लॉकडाउन के कारण न सुबह का समय रह गया और न रात का. रात को जल्दी सोने की कोशिश में देर रात तक बिस्तर पर जाना हो पाता है. जल्दी सोने की कोशिश इसलिए क्योंकि सुबह जल्दी उठकर फिर सोना होता है...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
kumarendra singh sengar
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अपने कॉलेज में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर होने वाले कार्यक्रम में विचार रखना हैं, इसी सन्दर्भ में नेट पर इधर-उधर कुछ वेबसाइट को उलटा-पलटा जा रहा था. कई-कई बिंदु एक जैसे ही मिले और उनका सार यही निकला कि 30 दिसम्बर 2014 तक जो अवैध प्रवासी देश में आ चुके हैं, यदि व...
kumarendra singh sengar
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मार्च माह का अंतिम दिन है. देश भर में सभी कार्यालयों में अपनी तरह से क्लोजिंग मनाई जा रही है. देश में इसे भी एक उत्सव की तरह से मनाया जाता है. कई-कई कार्यालयों में, सरकारी, गैर-सरकारी संस्थानों में हफ़्तों पहले से इस आयोजन को मनाया जाने लगता है. लोगों की भागदौड़, व्य...
kumarendra singh sengar
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आखिरकार होली हो ली. दिन भर धमाचौकड़ी चलती रही, कभी बच्चों की, कभी बड़ों की. इसी धमाचौकड़ी में मित्र-मंडली संग शहर की सुनसान पड़ी सड़कों पर टहलना हुआ. अलग-अलग रंग के, अलग-अलग जीव दिखाई दिए. कुछ रंग में मस्त, कुछ भंग में मस्त. कुछ तेज रफ़्तार बाइक में मगन, कुछ दारू के नशे...
kumarendra singh sengar
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मोबाइल को किसी भी सदी का सबसे बड़ा अविष्कार माना जाना चाहिए. मोबाइल ने ही एक साधे, सब सधे की अवधारणा को पूरा किया है. बातचीत के लिए बनाये गए इस यंत्र ने अपने तंत्र में इतना कुछ समेट लिया है कि कई बार तो समझ ही नहीं आता है कि इसका उपयोग किसके लिए प्रमुखता से किया जात...