ब्लॉगसेतु

Shachinder Arya
0
कभी-कभी हम नहीं जानते हम क्यों डूब रहे हैं। बस हम डूबना जानते हैं। आहिस्ते से इस पते पर रुक गयी एक नज़र उन सारे दिनों में पीछे ले जाने के लिए काफ़ी होती होगी, जब वह मुझ इस तरह ‘नॉन सीरियस’ से दिखने वाले लड़के में दिख जाने वाली सारी खूबियों को किन्हीं और अर्थों में बदल...
Shachinder Arya
0
वह उस कमरे में साड़ी पहनकर खड़ी है। साड़ी कुछ घाघरे जैसी दिखती रही। जैसे कहीं राजस्थान या गुजरात में उसका घर हो। तस्वीर वह खुद भी थी और उसके पीछे दीवार पर भी एक और तस्वीर लगी हुई है। फ़ोटो बहाई मंदिर, लोटस टैम्पल, नेहरू प्लेस की है। शायद हम उन्ही की तस्वीरें लगाते हैं,...
Shachinder Arya
0
उसने कभी सोचा नहीं था के आज इस बरसात के बाद इस ढलती शाम में अचानक वह फ़िर दिख जाएगी। वह अभी भी साँवली थी। उसे यह रंग सबसे जादा पसंद था। अपना नहीं, उस लड़की का। जैसे अभी भूरे बादलों ने उजले आसमान को ढक लिया हो। वह अपने दिल की धड़कनों में ढलते हुए सूरज की तरह धीरे-धीरे...
Shachinder Arya
0
हम सब सपनों में रहने वाले लोग हैं। सपने देखते हैं। और चुप सो रहते हैं। उनमें कहीं कोई दीमक घुसने नहीं देते। बक्से के सबसे नीचे वाली तरी में छिपाये रहते हैं। कहीं कोई देख न ले। उसमें किसी की बेवजह आहट कोई खलल न डाल दे। सब वैसा का वैसा बना रहे जैसे सपनों में देखा है।...