ब्लॉगसेतु

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--भाषण से बहलाने वालों, वचनों के कंगाल सुनोमाल मुफ्त का खाने वालों, जंगल के शृंगाल सुनो--बिना खाद-पानी के कैसे, खेतों में बिरुए पनपेंठेकेदारों ने उन सबका हड़प लिया है माल सुनो--प्राण निछावर किये जिन्होंने आजादी दिलवाई थीउन सबके वंशज गुलशन में आज हुए बेहाल सुनो--घेर...
ANITA LAGURI (ANU)
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रात्रि का दूसरा पहरकुछ पेड़ ऊँघ रहे थेकुछ मेरी तरह शहर का शोर सुन रहे थेकि पदचापों की आती लय ताल नेकानों में मेरेपंछियों का क्रंदन उड़ेल दियातभी देखा अँधेरों मेंचमकते दाँतों के बीचराक्षसी हँसी से लबरेज़ दानवों कोजो कर रहे थे प्रहार हम परकाट रहे थे हमारे हाथों कोप...
Kajal Kumar
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 पोस्ट लेवल : जंगली लुंगी
Kajal Kumar
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sanjiv verma salil
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लघुकथा जंगल में जनतंत्र - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल" * जंगल में चुनाव होनेवाले थे। मंत्री कौए जी एक जंगी आमसभा में सरकारी अमले द्वारा जुटाई गयी भीड़ के आगे भाषण दे रहे थे- 'जंगल में मंगल के लिए आपस का दंगल बंद कर एक साथ मिलकर प्रगतिति की रह...
Manisha Sharma
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भारत में बढ़ रहा है जंगलऐसे समय जब भारत में पर्यावरण को लेकर चिंताये जताई जा रही हैं, प्रदूषण से भारत के तमाम शहरों खास कर दिल्ली  इत्यादी में बुरा हाल है,  सरकार से लेकर आदालतों तक प्रदूषण कम करने के अनेक उपाय किये जा रहें हैं  तब एक ऐसी खबर आई है ज...
 पोस्ट लेवल : भारत जंगल
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दिल्ली में अचानक शरद ऋतु में गर्मी बढ़ीहुई हवा से नज़ाकत नमी नदारत साँसों में बढ़ती ख़ुश्की बहुत हलकान ज़िन्दगी झरे पीले पत्ते पेड़ों से घाम में घिसटती घास तपन से मुरझा गयीगर्म हवा ने रुख़ किया अपने आसम...
kumarendra singh sengar
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जंगल काटकर कंक्रीट के जंगल खड़े कर देने वाला इन्सान अब सुकून पाने के लिए जंगलों की तरफ ही दौड़ रहा है. नगरों की आपाधापी भरे जीवन में कुछ पल सुकून के पाने के लिए वह जंगलों की तरफ जा रहा है. इसके लिए वह जंगलों में अपने सुख-सुविधा के इंतजाम भी करने में लगा हुआ है. इसके...
मुकेश कुमार
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प्रकाशित हुआ कुछ ऐसा किशहरी जंगल में बसा मेरा दो कमरे का घरघर की छोटी सी  छतवहीँ कोने में कुछ गमलेथोड़ी सी हरियालीथोड़ी रंगीन पंखुरियांखिलते फूलों व अधखिली कलियों की खुश्बूएक दिन, अनायास गलती से, गुलाब के गमले मेंछितर गईं थीं कुछ पंखुरियां,फिजां भी महकतीवाह...
Neeraj Kumar Neer
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"जंगले में पागल हाथी और ढोल" संग्रह से एक कविता :----------------------कुछ तो नया कीजिये अबके नए साल मेंसूर्य वही चाँद वहीधूप  वही छांव वहीवही गली वही डगरगांव वही, वही शहरघृणा वही, रार वहीदिलों में दीवार वहीमंदिर और मस्जिद केजारी हैं तकरार वहीप्रेम होना चाहिए...