--भाषण से बहलाने वालों, वचनों के कंगाल सुनोमाल मुफ्त का खाने वालों, जंगल के शृंगाल सुनो--बिना खाद-पानी के कैसे, खेतों में बिरुए पनपेंठेकेदारों ने उन सबका हड़प लिया है माल सुनो--प्राण निछावर किये जिन्होंने आजादी दिलवाई थीउन सबके वंशज गुलशन में आज हुए बेहाल सुनो--घेर...