ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दिल्ली में अचानक शरद ऋतु में गर्मी बढ़ीहुई हवा से नज़ाकत नमी नदारत साँसों में बढ़ती ख़ुश्की बहुत हलकान ज़िन्दगी झरे पीले पत्ते पेड़ों से घाम में घिसटती घास तपन से मुरझा गयीगर्म हवा ने रुख़ किया अपने आसम...
kumarendra singh sengar
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जंगल काटकर कंक्रीट के जंगल खड़े कर देने वाला इन्सान अब सुकून पाने के लिए जंगलों की तरफ ही दौड़ रहा है. नगरों की आपाधापी भरे जीवन में कुछ पल सुकून के पाने के लिए वह जंगलों की तरफ जा रहा है. इसके लिए वह जंगलों में अपने सुख-सुविधा के इंतजाम भी करने में लगा हुआ है. इसके...
मुकेश कुमार
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प्रकाशित हुआ कुछ ऐसा किशहरी जंगल में बसा मेरा दो कमरे का घरघर की छोटी सी  छतवहीँ कोने में कुछ गमलेथोड़ी सी हरियालीथोड़ी रंगीन पंखुरियांखिलते फूलों व अधखिली कलियों की खुश्बूएक दिन, अनायास गलती से, गुलाब के गमले मेंछितर गईं थीं कुछ पंखुरियां,फिजां भी महकतीवाह...
Neeraj Kumar Neer
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"जंगले में पागल हाथी और ढोल" संग्रह से एक कविता :----------------------कुछ तो नया कीजिये अबके नए साल मेंसूर्य वही चाँद वहीधूप  वही छांव वहीवही गली वही डगरगांव वही, वही शहरघृणा वही, रार वहीदिलों में दीवार वहीमंदिर और मस्जिद केजारी हैं तकरार वहीप्रेम होना चाहिए...
Meena Sharma
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1- जानवरों का नववर्षजंगल के पशुओं ने सोचाहम भी धूम मचाएँ ,मानव के जैसे ही कुछहम भी नववर्ष मनाएँ !वानर टोली के जिम्मे हैफल-फूलों का इंतज़ाम,मीठे-मीठे मधु के छत्तेले आएँगे भालूराम !हिरन और खरगोश पकाएँसाग और तरकारी,सारे पक्षी मिलजुल कर लेंदावत की तैयारी !नृत्य कार्यक्र...
Aparna  Bajpai
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पलाश के लाल-लाल फूल खिलते हैं जंगल में,मेरा सूरज उगता है तुम्हारी आँखों में,मांग लेती हूँ धूप  थोड़ी सी तुमसे;न जाने कब,हमारे प्रेम का सूरज डूब जाए मुरझा जाएँ पलाश मरणासन्न हो जाये जंगल,कोशिश हैखिले रहें पलाश ,हरा रहे जंगल बची रहे तुम्ह...
Ravindra Pandey
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सड़क अपने धुन में चली जा रही थी..-------------------**--------------------एक सड़क दूर तक, चली जा रही थी..किनारे के पेड़ों से बतिया रही थी..वो सड़क दूर तक, बस चली जा रही थी...उस सड़क के किनारे, खड़े पेड़ सारे...उन्हीं पेड़ो में एक पीपल खड़ा था...अभी साखें थी कोपल, थोड़ा नकचढ़ा...
Bharat Tiwari
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किस बात का जंगलराज? कैसा भीड़तंत्र? सब सही चल रहा है। All is well! — अभिसार शर्मा7 लोग मार दिए गए। बीजेपी-शासित झारखंड में। शक के आधार पर। व्हाट्सएप पर एक अफवाह के आधार पर। आरोप था बच्चा चोरी का। बच्चे चोरी ही नही हुए और 7 घरों के चिराग तुमने बुझा दिए! (adsbygo...
जन्मेजय तिवारी
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                  जब से राजमाता लोमड़ी ने वानप्रस्थ आश्रम में जाने की तैयारी शुरु की है, तभी से अखिल जंगल दल का समूचा बल युवराज के सिर पर टूट पड़ा है । सत्ता का सुख ही ऐसा होता है कि त्याग की मूर्ति देवी को भी राजमा...
ललित शर्मा
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