ब्लॉगसेतु

जन्मेजय तिवारी
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                    दरबार-ए-खास में विशेष सन्नाटा था । महाराज सियार और उनके दो-चार सेवकों के अलावा वहाँ कोई नहीं था । महाराज ने सभी मंत्रियों को विलंब से आने का आदेश दिया था । इस वक्त उन्हें इंतजार था किसी का ।...
Manisha Sharma
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पिछले कुछ समय से भारत के तमाम शहरों, कस्बों और गांवो से  तेंदुए के घरों में या लोगों की बस्तियों में घुस आने की खबरें आती रहती हैं। कुछ समय पहले बैंगलुरु के एक स्कूल में  तेंदुए के घुसने की खबर सुर्खी बनी थी। इससे पहले आगरा, मुम्बई, लखनऊ, देहरादून इत्यादि...
 पोस्ट लेवल : जानवर जंगल जीवन
Sandhya Sharma
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महाराष्‍ट्र को गुफाओं के क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है जहां हीनयान के काल से ही अनेक गुफाओं का निर्माण हुआ और स्‍थापत्‍य शास्‍त्र के ऐसे विधान और प्रतिमान खड़े किए जिनका आज तक कोई मुकाबला नहीं। यहां लगभग 200 ईसापूर्व में शिल्पियों ने पहाड़ों को ही प्रासादों के...
संतोष त्रिवेदी
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मंत्री जी ने सचिव को तलब किया।वे देश के मौजूदा हालात की समीक्षा करने के लिए बड़ी देर से बेचैन थे।सचिव ने मंत्री जी के सामने साप्ताहिक रिपोर्ट पेश की।बात कोई ख़ास नहीं थी।ले-देकर देश में कुछ समस्याएं ही बची थीं,जो माननीय मंत्री जी से बार-बार भेंट करना चाहती थीं।मंत्री...
kumarendra singh sengar
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पानी के लिए लगभग समूचे देश में हाहाकार मचा हुआ है. इस हाहाकार में सर्वाधिक बुरी स्थिति में बुन्देलखण्ड क्षेत्र दिखाई दे रहा है. अब तो नित्य ही खबरें सामने आ रही हैं जिनसे ज्ञात हो रहा है कि कई-कई इलाकों में तो दसियों दिन से पानी की एक बूँद के दर्शन भी नहीं हुए हैं...
Ashok Kumar
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जंगल  झिर्रियों से आ रही हवा किसी धारदार हथियार की तरह जख़्मी कर रही थी। गोमती ने साड़ी का पल्लू चेहरे पर लपेट लिया और बाबू को और कस के भींच लिया। रामेसर ने बीड़ी सुलगा ली थी। गोमती का मन किया कि मांग के दो कश लगा ले तो थोड़ी ठंढ कटे। यह सोच कर ही उसके होठों पर एक...
 पोस्ट लेवल : ashok kumar pandey कहानी जंगल
रणधीर सुमन
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        स्वामी सहजानन्द सरस्वती, राहुल सांस्कृत्यायन, जयबहादुर सिंह  भातखण्डे राय, जैसे किसान नेताओं के आन्दोलन से जमीनदारी का खात्मा हुआ और देश की बहुसंख्यक आबादी के हिस्से में जमीन आयी थी।             &nbsp...
 पोस्ट लेवल : जमीन किसान जंगल जल
Kajal Kumar
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Kajal Kumar
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दिनेशराय द्विवेदी
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पुरखे जरूर गांव के थे, लेकिन मैं एक छोटे शहर में पैदा हुआ। वहां कोई जंगल-वंगल नहीं था, जहां लोग जाते। शहर से लगी हुई एक और उस से आधा किलोमीटर दूर दूसरी नदी थी। बहुत से लोग वहां जाते और तटों पर हाज़त खारिज कर के गंदगी फैलाते। हालांकि ख़ास इसी वजह से अल्लाह के भे...