ब्लॉगसेतु

महेन्द्र श्रीवास्तव
0
सच कहूं, जब आपके दिन बुरे चल रहे हों, तो भले ही आप हाथी पर क्यों ना बैठे हों, कुत्ता काट ही लेगा। राजनीति में भी हमेशा एक सा नहीं रहता, कुछ ऐसा वैसा चलता ही रहता है। दो दिन पहले कुछ बुद्धिजीवियों के साथ बैठा था। यहां सभी राजनीति के गिरते स्तर और भ्रष्टाचार पर बहुत...
Sandhya Sharma
0
....कांक्रीट के जंगल मेंअकेला खड़ा वटवृक्षभयभीत है...?व्याकुल है आजचौंक उठता हैहर आहट सेजबकि जोड़ रखे हैंकितने रिश्ते - नातेसांझ के धुंधलके मेंदूर आसमान मेंटिमटिमाते तारेशांत हवा के झोंके मेंगूंजता अनहद नादपाकर धरती काकोमल स्पर्शना जाने क्यूँछलक उठे हैंउसके मौन नयन.....
Kajal Kumar
0
उसकी माँ पुराने ज़माने की थी. जब भी परिवार का कोई, अस्पताल में भर्ती होता तो उसकी माँ अस्पताल पहुंचते ही आसपास के लोगों से बातचीत शुरू कर देती चाहे मरीज़ हों या उन्हें देखने वाले. वार्ड बॉय हो या नर्स, आगे बढ़-बढ़ के सबसे बात करती. डॉक्टर आते तो उन्हें भी एक बात प...
महेन्द्र श्रीवास्तव
0
गुजरात में चुनावी चौपाल की भागमभाग के बीच एक दिन समय निकाल कर हम सब पहुंच गए जूनागढ़ में गीर के जंगलों में। वैसे तो मैं कई बार जिम कार्बेट, नेशनल दुधवा पार्क गया हूं, लेकिन आज तक मैं शेर के दर्शन नहीं कर पाया था। हां पिछली दफा दुधवा नेशनल पार्क में जरूर एक शेर की प...
Kajal Kumar
0
वह जंगल में कहीं खो गया था.जंगल बहुत घना था और रात का अंधेरा घि‍रने को था, दि‍न का उजाला कम हो रहा था. उसे हर तरह के जंगली जानवरों का भी डर था. उसके पास अपना बचाव करने को कुछ नहीं था.उसने तय कि‍या कि‍ उसे इन हालात से बच नि‍कलने के लि‍ए ठंडे दि‍माग़ से सोचना होगा....
 पोस्ट लेवल : जीवन जंगल life jungle
jaikrishnarai tushar
0
चित्र -गूगल से साभार एक गज़ल -आराकशी को आप हुनर मत बनाइये आराकशी को आप हुनर मत बनाइये जंगल तबाह करके शहर मत बनाइये लौटेंगे शाम होते ही पंछी उड़ान से इन घोंसलों को फूँक के घर मत बनाइये ताज़ा हवा ,ये फूल ,ये खुशबू न छीनिए मुश्किल हम...
 पोस्ट लेवल : एक गज़ल /जंगल /शहर
ललित शर्मा
0
..............................
Sanjay Chourasia
0
आज पूरा विश्व जिस महाप्रलय से डर रहा है , उसका जिम्मेदार  कोई और नहीं हम मानव ही हैं ! आज हम लोगों ने ही इस महाप्रलय को स्वयं निमंत्रण दिया है ! पिछले बर्ष  जो जापान के साथ हुआ था  , वो महाप्रलय हम सभी ने अपनी आँखों से देखा&n...
विजय राजबली माथुर
0
Hindustan-Lucknow-03/08/2011Hindustan-Lucknow-03/08/2011Hindustan-Lucknow-02/08/2011Hindustan-Lucknow-04/08/2011Hindustan-Lucknow-04/08/2011Hindustan-Lucknow-05/08/2011(डा.सौदान सिंह जी को इस तथ्य की तहक़ीक़ात करानी चाहिए कि क्या संबन्धित डा .के सम्बंध किसी अंतर्रा...
 पोस्ट लेवल : मरीज डा . अमानवीय जंगल
ललित शर्मा
0
मैं जंगली हूँ,सीधा सा,भोला सा सबसे डरने वालाअपनी छोटी सी दुनिया में बसने वाला,रहने वालाअपने जंगल को चाहने वालाएक मृग के पीछे चला आयारास्ता भटक गया,पकड़ लिया गया मुझेशहर में घेरकर जंजीरों से बंधा गया मुझेइनमे मेरा अपना कोई नही थासब पीछे जंगल में छुट गयामेरी माँ,मेर...