--कोरोना को देख कर, बना रहे जो बात।वो ही देश-समाज को, पहुँचाते आघात।।--अच्छे कामों का जहाँ, होने लगे विरोध।आता देश समाज को, ऐसे दल पर क्रोध।।--मुखिया जिस घर में नहीं, होता है दमदार।समझो उस परिवार का, निश्चित बण्टाधार।। --मुखिया ने मझधार में, छोड़ी...