ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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विमर्श: बचाओ  पर्वत, घाटी, जमीन और सागर महासागरों का पानी पीने-योग्य मीठा व पौष्टिक होता तो सम्भवतय इंसान पर्वतों को समतल करके गगनचुंबी होटल्स, मोल्स, फ्लैट्स बनाकर नदियों को विलुप्त करवाकर उनकी तलछटी में झुग्गी-झोंपड़ियाँ बसा चूका होता; महासागरों को गट्टर...
पम्मी सिंह
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चित्राभिव्यक्ति रचनासायली छंदमासूमनिगहबान नजरबढाती उम्मीदें, ख्वाहिशेंसीचती मेरीजमीन।पम्मी सिंह 'तृप्ति'2.जख्मवजह बनीप्रेरित करती आत्मशक्ति,सुलझती रहीउलझनें।पम्मी सिंह 'तृप्ति'
ANITA LAGURI (ANU)
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रात्रि का दूसरा पहरकुछ पेड़ ऊँघ रहे थेकुछ मेरी तरह शहर का शोर सुन रहे थेकि पदचापों की आती लय ताल नेकानों में मेरेपंछियों का क्रंदन उड़ेल दियातभी देखा अँधेरों मेंचमकते दाँतों के बीचराक्षसी हँसी से लबरेज़ दानवों कोजो कर रहे थे प्रहार हम परकाट रहे थे हमारे हाथों कोप...
विजय राजबली माथुर
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 ****** याद रखना जरूरी है कि हमारे समाज की बुनियाद सामाजिक न्याय पर टिकी है। यदि समाज में शांति और सौहार्द्र की रूपरेखा बुनी गई है तो ऐसा करने वालों को हमें उनका हक देना होगा । ******घुमंतू समाज को कब मिलेगी घोषणापत्रों में जगह------ अश्वनि शर्मा2011 की ज...
ज्योति  देहलीवाल
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इंसान अपने खास प्रिय व्यक्ति को तोहफे में कुछ ऐसा अनोखा देना चाहता हैं जिससे तोहफ़ा पाने वाले व्यक्ति का दिल बागबाग हो जाएं। प्यार में आसमान से चाँद-तारे तोड़ कर लाने की बात अक्सर की जाती हैं। तोहफे के रुप में चाँद पर जमीन सबसे पहले शाहरुख खान को मिली। उनके अनुसार ए...
सुशील बाकलीवाल
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          चर्चगेट, मुंबई से मेरे घर से काम पर जाने के लिये लोकल ट्रेन की यह रोज़मर्रा की यात्रा थी । मैंने सुबह ६.५० की लोकल पकड़ी थी । ट्रेन मरीन लाईन्स से छूटने ही वाली थी कि एक समोसे वाला अपनी ख़ाली टोकरी के साथ ट्रेन...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
सुशील बाकलीवाल
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          एक अमीर आदमी अपने बेटे को लेकर गाँव गया, ये दिखाने कि गरीबी कैसी होती है । गाँव की गरीबी दिखाने के बाद उसने अपने बेटे से पूछा - "देखी गरीबी ?"           ...
विजय राजबली माथुर
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Mukesh Tyagi28-12-2016 कृषि में बैंक कर्ज और नोटबंदी :'सवा सेर गेहूँ' कहानी हम लोगों ने पढ़ी है और 'दो बीघा जमीन' जैसी फ़िल्में भी देखीं हैं जो गाँवों में सूदखोरों के भयंकर शोषण को दिखाती थीं। इससे ही जुडी कुछ बातें नए ज़माने के पूँजीवादी सूदखोरी की। 1947 में राज...
विजय राजबली माथुर
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राम कृष्ण23-10-2016 बेगूसराय के (विरपुर )में किसान सभा के सातवें जिला सम्मेलन में आज शामिल होने विरपुर पहुँचा ।कामरेड अतुल अंजान जी को सुनकर लड़ाई लड़ने की प्रेरणा मिलीं ,कामरेड अंजान ने कहा हर दो मिनट के अंदर एक किसान आत्महत्या कर रहे हैं ।पहले सामंतवाद था अब...