ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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दुःख या सुख कई जगहों से आता रहता है और जाता भी रहता है - शर्मिला बोहरा जालानसमीक्षा: जयशंकर की प्रतिनिधि कहानियांदुःख या सुख कई जगहों से आता रहता है और जाता भी रहता है। यह सब कुछ बहुस्तरीय चेतना से होता है जिन्हें मैं इन कहानियों में हर बार नए ढंग से पढ़ और समझ पाती...
Yashoda Agrawal
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जलता है यह जीवन पतंगजीवन कितना? अति लघु क्षण,ये शलभ पुंज-से कण-कण,तृष्णा वह अनलशिखा बनदिखलाती रक्तिम यौवन।जलने की क्यों न उठे उमंग?हैं ऊँचा आज मगध शिरपदतल में विजित पड़ा,दूरागत क्रन्दन ध्वनि फिर,क्यों गूँज रही हैं अस्थिरकर विजयी का अभिमान भंग?इन प्यासी तलवारों से,इ...
 पोस्ट लेवल : जयशंकर प्रसाद
Yashoda Agrawal
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तुम कनक किरन के अंतराल मेंलुक छिप कर चलते हो क्यों ?नत मस्तक गवर् वहन करतेयौवन के घन रस कन झरतेहे लाज भरे सौंदर्य बता दोमोन बने रहते हो क्यो?अधरों के मधुर कगारों मेंकल कल ध्वनि की गुंजारों मेंमधु सरिता सी यह हंसी तरलअपनी पीते रहते हो क्यों?बेला विभ्रम की बीत चलीरजन...
Roshan Jaswal
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शीघ्र सोने और प्रातःकाल जल्दी उठने वाला मान&#2357...
 पोस्ट लेवल : जयशंकर प्रसाद
Roshan Jaswal
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प्रत्येक स्थान और समय बोलने योग्य नहीं रहते&#2404...
 पोस्ट लेवल : जयशंकर प्रसाद
Yashoda Agrawal
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धूप छांह खेल सदृशसब जीवन बीता जाता हैसमय भागता प्रतिक्षण में,नव-अतीत के तुषार-कण मेंहमें लगाकर भविष्य-रण मेंआप कहां छिप जाता हैसब जीवन बीता जाता है.बुल्ले, नहर, हवा के झोंकेमेघ और बिजली के टोंके,किसका साहस है कुछ रोके,जीवन का वह नाता हैसब जीवन बीता जाता हैवंशी को ब...
विजय राजबली माथुर
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महलो मे साजिशे होती है मगर झोपड़ी में प्यार पलता हैं और यह प्यार जयशंकर सिंह की पूंजी है और दुनिया की सबसे बड़ी कमाई ।राम कृष्ण04-11-2016  · Begusarai आज तीन बजे इस दुनिया को अलविदा कर गये कामरेड जयशंकर प्रसाद सिंह ।जब कामरेड बीमार थे तब मैं...
अनंत विजय
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अभी हाल ही में एक बार फिर से एक अंग्रेजी शब्दकोश ने उन शब्दों की सूची जारी की है जो उन्होंने हिंदी समेत विश्व की दूसरी भाषाओं से लेकर अंग्रेजी में मान्यता दी हैं । यह अंग्रेजी का लचीलापन है जो उसको दूसरी भाषा के शब्दों को अपनाने में मदद करती है । अंग्रेजी जब इन शब्...
sanjiv verma salil
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विरासत आँसू  जयशंकर​ प्रसादछिल-छिल कर छाले फोड़े मल-मल कर मृदुल चरण से धुल-धुल कर बह रह जाते आँसू करुणा के कण से​*​इस हृदय कमल का घिरना अलि अलकों की उलझन में आँसू मरन्द का गिरना मिलना निश्वास पवन में​*​चातक की चकित पुकारें&nb...
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हिन्दी के उन्नायकजयशंकर प्रसाद"हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती स्वयंप्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़-प्रतिज्ञ सोच लो प्रशस्त पुण्य पंथ हैं - बढ़े चलो बढ़े चलो असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह-सी सप...