ब्लॉगसेतु

मुकेश कुमार
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सफ़र के आगाज में मैं था तुम साजैसे तुम उद्गम से निकलती तेज बहाव वाली नदी की कल कल जलधाराबड़े-बड़े पत्थरों को तोड़तीकंकड़ों में बदलती, रेत में परिवर्तित करतीबनाती खुद के के लिए रास्ता.थे जवानी के दिनतभी तो कुछ कर दिखाने का दंभ भरतेजोश में रहते, साहस से लबरेज&nb...
केवल राम
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लेकिन दो से एक होने के मायने और एक और एक होने के मायने बहुत अलग हैं. मैं उसे यही बात समझाने की कोशिश करता, लेकिन उसे लगता कि प्रेम में सिद्धान्त का क्या काम, वहां तो मौज-मस्ती है, घूमना फिरना है, गप्पें मारना है, मिलना-जुलना है और फिर एक उम्र के बाद शादी के बन्धन म...
मधुलिका पटेल
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ये कहकर गया था जब अबकी बार आउंगामाँ गोद में तेरी सर रख कर जी भरकर सोउँगा ।लाल मेरा तू तो है भारत माता का प्रहरीइसीलिये नींद तेरी रहती थीं आँखों से ओझलकभी न वो तेरी पलकों में ठहरी ।पर माँ का दिल आज अचानक से दरक गयाक्यों आज पूजा का थाल हाथ से सरक गया ।जहां कहीं मेरे...
केवल राम
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एक दिन मैं अपने मित्र से बात कर रहा था. बातों-बातों में बात प्रेम के विषय तक आ पहुंची. बात-बात में मैंने महसूस किया कि वह अपने प्रेम को लेकर संशय की स्थिति में है. वह अपने प्रेम के अनुभवों और भविष्य की स्थितियों को लेकर बहुत असमंजस में था. उसे लग रहा था कि कहीं वह...
मुकेश कुमार
208
सफ़र के आगाज में मैं था तुम साजैसे तुम उद्गम से निकलतीतेज बहाव वाली नदी की कल कल जलधाराबड़े-बड़े पत्थरों को तोड़तीकंकड़ों में बदलती, रेत में परिवर्तित करतीबनाती खुद के के लिए रास्ता.थे जवानी के दिनतभी तो कुछ कर दिखाने का दंभ भरतेजोश में रहते, साहस से लबरेज !!सफ़र के मध्य...
अविनाश वाचस्पति
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ललित शर्मा
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ललित शर्मा
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Vivek Rastogi
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    रोज रात्रि भोजन के पश्चात अपनी घरवाली के साथ एकाध घंटा घूम लेते हैं, जिससे बहुत सारी बातें भी हो जाती हैं, और पान खाना भी हो जाता है।     वैसे तो यहाँ बैंगलोर में हमने जितने जवान लोग भारत के हरेक हिस्से से आये हुए देखे हैं, उतने...