ब्लॉगसेतु

मुकेश कुमार
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जिंदगी कितनी कमीनी है, कितनी डरी हुई है और कितना परेशान करती है। देर रात, गले में पता नहीं क्या अटका, एक हल्का सा दर्द पूरे शरीर को सिहराने के लिए काफी था। फिर तो सारा दिमाग अगले क्षण से लेकर अगले बरसो तक का खाका खींचते चला गया, जिसमें हम नहीं थे व दुनिया बेनूर हो...
ANITA LAGURI (ANU)
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"वाह...!  क्या जादू है तुम्हारे हाथों में,तुम्हारे हाथों से बनी चाय पीकर तो लगता है कि जन्नत के दर्शन हो गये।  सच कहता हूँ सुधा, शादी की पहली सुबह और आज 50 साल बीत जाने के बाद भी तुम्हारे हाथों की बनी चाय में कोई फ़र्क़ नहीं आया।" श्याम जी कहते-कह...
ANITA LAGURI (ANU)
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झमेले ज़िन्दगी के तमाम बढ़ गये           मार खा...
PRABHAT KUMAR
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जी रहा हूँ जिंदगी अब जुल्फ के साये मेंवो रात खुशनुमा शान थी अदाओं मेंहसरतें मिट गईं, चाहत का इम्तहान हो गयाअजनबी बनकर रहे किस्सों में विहान हो गयाचल पड़ी है जिंदगी किसी और पेड़ की छांव मेंलेकिन उसी का इंतजार है अभी अपनी राहों में#प्रभातPrabhat Prabhakar
मुकेश कुमार
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बचपन में थी चाहतें किबनना है क्रिकेटरमम्मी ने कहा बैट के लिए नहीं हैं पैसेतो अंदर से आई आवाज ने भी कहानहीं है तुममे वो क्रिकेटर वाली बातवहीं दोस्तों ने कहातेरी हैंडराइटिंग अच्छी हैतू स्कोरर बनऔर बसइन सबसे इतरफिर बड़ा हो गयाजिंदगी कैसे बदल जाती है नसुर चढ़ा बनूंगा कवि...
सुमन कपूर
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.............  सोचते सोचते यूँ ही  उम्र गुजर जाएगी कर्मों के निशां रह जायेंगे जिन्दगी फ़ना हो जाएगी !!सु-मन
 पोस्ट लेवल : उम्र जिंदगी
सुमन कपूर
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इस दफ़ा शब्दों के मानी बदल गएनहीं उतरे कागज़ पर , तकल्लुफ़ करते रहेवक़्त के हाशिये पर देता रहा दस्तकअनचिन्हा कोई प्रश्न, उत्तर की तलाश मेंकागज़ फड़फड़ाता रहा देर तकबाद उसके, थोड़ा फट कर चुप हो गयाआठ पहरों में बँटकर चूर हुआ दिनटोहता अपना ही कुछ हिस्सा वजूद की तलाश मेंएक सिर...
 पोस्ट लेवल : यादें वक्त जिंदगी
मुकेश कुमार
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बोनसाई पेड़ों जैसीहोती है जिंदगी, मेट्रो सिटी में रहने वालों कीमिलता है सब कुछलेकिन मिलेगा राशनिंग मेंपानीबिजलीवायुघर की दीवारेंपार्किंगयहाँ तक की धूप भीसिर्फ एक कोना छिटकता हुआहै न सचख़ास सीमा तक कर सकते हैं खर्चपानी या बिजलीअगर पाना हैसब्सिडाइज्ड कीमतवर्नाभुगतो बजट...
sanjiv verma salil
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मुक्तिका: जिंदगी की इमारत*जिंदगी की इमारत में, नींव हो विश्वास की।प्रयासों की दिवालें हों, छत्र हों नव आस की।*बीम संयम की सुदृढ़, मजबूत कॉलम नियम के।करें प्रबलीकरण रिश्ते, खिड़कियाँ हों हास की।।*कर तराई प्रेम से नित, छपाई कर नीति से।ध्यान धरना दरारें बिलकुल न...
मुकेश कुमार
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बात 2008 की थी, उन दिनों ऑरकुट का जमाना था, तभी एक नई बात पता चली थी कि "ब्लोगस्पॉट" गूगल द्वारा बनाया गया एक अलग इजाद है, जिसके माध्यम से आप अपनी बात रख सकते हैं और वो आपका अपना डिजिटल डायरी होगा | जैसे आज भी कोई नया एप देखते ही डाउनलोड कर लेता हूँ, तो कुछ वैसा ही...