ब्लॉगसेतु

सुमन कपूर
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एक क्षण -ओझल हो गया सबभूत का बोझ उठायेशिथिल कदमों में आ गई आतुरताझुक गया 'मैं' का स्वामित्वआसान न थाउस पार का सफरमिथिल भ्रम की उपासना का मोहजन्मजात क्रियाओं का दम्भबहुतेरा था इस पार के स्थायित्व के लिए मझधार, भावनाओं का ज्वारडोलता रहा इस पार से उस पारस्थितप्रज्ञ तु...
 पोस्ट लेवल : चेतना जिंदगी
Manisha Sharma
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कोरोना काल में बहुत कुछ बदलेगा - स्वचालित नल लगाने होंगेआपके मैं एक उदाहरण से बताना चाहूंगी कि कोरोना के समय और इसके बाद कैसे हम लोगों की दुनिया छोटी छोटी बातों में बदल जायेगी। हमारी सोसाइटी के क्लब में कुछ समय पहले तक जब कि कोरोना का कोई नाम भी नहीं जानता था...
Manisha Sharma
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एयरकंडीशनर का तापमान 24 डिग्री रखने पर हमारे अनुभवभारत में इस समय गर्मियों का मौसम है। अधिकांश जगहों पर दिन का तापमान 45-47 डिग्री के करीब चल रहा है। करीब-करीब हर घर में एसी (Air Conditioner - AC) का इस्तेमाल हो रहा है। गर्मियों से बचने के लिए लोग एयर कंडीशनर...
Nitu  Thakur
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नवगीतरेल जैसी जिंदगीनीतू ठाकुर 'विदुषी'मापनी 14/14और अन्तस् मौन चीखेधड़धड़ाहट शोर आगेरेल जैसी ज़िंदगी येपटरियों के संग भागे1कल्पनाओं से भरा हैमिथ्य यह संसार देखाबंधनों में बांधती हैजीवितों को भाग्य रेखाव्याधियाँ हँसने लगी हैंसो रहे दिन रात जागे।उलझनें सुलझा रहा मनसाँस...
सुमन कपूर
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आज बहुत दिन ऑफिस जाना हुआ आज मिली फिर तुमसेबैठी कुछ देर तुम संगकी दो चार बातें खूब चहक रही तुम लाल पीले फूलों संग बोटल-ब्रस भीझूम रहा था लाली से गुलाब और चमेलीमहक रहे थे शान सेनहीं था भय तुम्हें किसी संक्रमण काप्रकृति को खुद में समायेल...
मुकेश कुमार
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जिंदगी कितनी कमीनी है, कितनी डरी हुई है और कितना परेशान करती है। देर रात, गले में पता नहीं क्या अटका, एक हल्का सा दर्द पूरे शरीर को सिहराने के लिए काफी था। फिर तो सारा दिमाग अगले क्षण से लेकर अगले बरसो तक का खाका खींचते चला गया, जिसमें हम नहीं थे व दुनिया बेनूर हो...
ANITA LAGURI (ANU)
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"वाह...!  क्या जादू है तुम्हारे हाथों में,तुम्हारे हाथों से बनी चाय पीकर तो लगता है कि जन्नत के दर्शन हो गये।  सच कहता हूँ सुधा, शादी की पहली सुबह और आज 50 साल बीत जाने के बाद भी तुम्हारे हाथों की बनी चाय में कोई फ़र्क़ नहीं आया।" श्याम जी कहते-कह...
ANITA LAGURI (ANU)
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झमेले ज़िन्दगी के तमाम बढ़ गये           मार खा...
PRABHAT KUMAR
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जी रहा हूँ जिंदगी अब जुल्फ के साये मेंवो रात खुशनुमा शान थी अदाओं मेंहसरतें मिट गईं, चाहत का इम्तहान हो गयाअजनबी बनकर रहे किस्सों में विहान हो गयाचल पड़ी है जिंदगी किसी और पेड़ की छांव मेंलेकिन उसी का इंतजार है अभी अपनी राहों में#प्रभातPrabhat Prabhakar
मुकेश कुमार
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बचपन में थी चाहतें किबनना है क्रिकेटरमम्मी ने कहा बैट के लिए नहीं हैं पैसेतो अंदर से आई आवाज ने भी कहानहीं है तुममे वो क्रिकेटर वाली बातवहीं दोस्तों ने कहातेरी हैंडराइटिंग अच्छी हैतू स्कोरर बनऔर बसइन सबसे इतरफिर बड़ा हो गयाजिंदगी कैसे बदल जाती है नसुर चढ़ा बनूंगा कवि...