ब्लॉगसेतु

भावना  तिवारी
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--रंग-मंच है जिन्दगी, अभिनय करते लोग।नाटक के इस खेल में, है संयोग-वियोग।।--विद्यालय में पढ़ रहे, सभी तरह के छात्र।विद्या के होते नहीं, अधिकारी सब पात्र।।--आपाधापी हर जगह, सभी जगह सरपञ्च।।रंग-मंच के क्षेत्र में, भी है खूब प्रपञ्च।।--रंग-मंच भी बन गया, जीवन का जंजाल।...
सुमन कपूर
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.....क्या खूब इन्सानियत की हस्ती हो गई हथियार बेशकीमती जिंदगी सस्ती हो गई !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : इन्सानियत जिन्दगी
सुमन कपूर
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ऐ जिंदगी !...जन्मदिन पर कर दे कुछ हर्फ़ मेरे नाम रख उन हर्फ़ों मेंअश्क़ों सी ताज़गीकलम के रंग कोकर दे लहू सा गूढ़ा लालभरते हर पन्ने मेंडाल दे अंतिम श्वास का भावकि अनगिनत अनजीये लम्हों को यादों की कब्र में सकून से दफना दूँ !!सु-मन
VMWTeam Bharat
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एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे रिपोर्ट में भारत को महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताया गया है। थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की सर्वे में महिलाओं के प्रति यौन हिंसा, मानव तस्करी और यौन व्यापार में ढकेले जाने के आधार पर भारत को महिलाओं के लिए खतरनाक बताय...
सुमन कपूर
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ठक ठक ...कौन ? अंदर से आवाज़ आई |मैं \ बाहर से उत्तर आया |मैं !! मैं कौन ?जिंदगी .... , उसने जवाब दिया |अच्छा ! किसकी ? \ अंदर से सवाल |तुम्हारी \ भूल गई मुझे ... | इसी बीच मन के अधखुले दरवाजे को लांघ कर उसने भीतर प्रवेश कर लिया | मैं कभी किसी को नहीं भूलती \ पर अकस...
 पोस्ट लेवल : कहानी जिन्दगी जिंदगी
VMWTeam Bharat
106
जुड़ते -टूटते धागों ने ,जलते बुझते आगों ने ,बनते बिगड़ते रागों ने ,समाज के विषधर नागों नेपद-निशान को किसने मोड़ दियापथ " निशान " का किसने मोड़ दिया ||१पकड़ते छूटते हाथों नेमिलते बिछड़ते साथों नेबनती बिगडती बातों नेमुंह मांगी सौगातों नेपद-निशान को किसने मोड़ दियापथ " निशान...
भावना  तिवारी
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जिन्दगीविवसता में  हाथ  कैसे  मल रही  है जिन्दगीमनुज से ही मनुजता को छल रही है जिन्दगीएक  छोटे  से  वतन  के  सत्य  में आभाव मेंरास्ते की पटरियों  पर  पल  रही  है जिन्दगी//0//फूल  है  जि...
 पोस्ट लेवल : मुक्तक__जिन्दगी
सुमन कपूर
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अनगिनत प्रयास के बाद भीअब तक'तुम' दूर हो अछूती हो और 'मैं' हर अनचाहे से होकर गुजरता प्रारब्ध ।एक दिन किसी उस पल बिना प्रयास 'तुम' चली आओगीमेरे पास और बाँध दोगी श्वास में एक गाँठ ।तब तुम्हारे आलिंगन में सो जाऊँगा 'मैं' गह...
Vikram Pratap Singh Sachan
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दिल्ली से प्रकशित पत्रिका "डिफेंडर" में आदरणीय डॉ गोरखप्रसाद  मस्ताना जी  पुस्तक की समीक्षा लिखी।
Vikram Pratap Singh Sachan
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व्यंगात्मक कवितायें :पाठक के मन को गुदगुदाती, व्यवस्था और राजनीति, सामाजिकता पर तंज कसती कवितायेंसंजीदा कवितायें :कवितायें जो रिश्तों​​ के बदलते मायने को टटोलती है, कवितायें जो आधुनिकता के मकड़जाल में फसते जाते सामजिक सरोकारों को खोजती है। जो नयी दोस्ती में पुरनेपन...