ब्लॉगसेतु

Jaydeep  Kumar
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जिन्दगी सुनहरा तोहफा है, इसे भगवान की तरफ से कबूल कीजिये.
 पोस्ट लेवल : जिन्दगी
सुमन कपूर
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एक दिया रौशन कर देता है जिन्दगी हौसले की लौ को जब जलाता है वो !!सु-मन दीप पर्व मुबारक !!
 पोस्ट लेवल : जिन्दगी हौसला
सुमन कपूर
394
चल उम्मीद के तकिये पर सर रख कर सोयें ख़्वाबों में बोयें कुछ जिन्दगी क्या मालूम सुबह जब आँख खुले हर उम्मीद हो जाये हरी भरी !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : जिन्दगी ख़्वाब उम्मीद
सुमन कपूर
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मेरे जाने के बादहोती रहेंगी यूँ ही सुबहेंशामें भी गुजरेंगी इसी तरहरातें कभी अलसाई सी स्याह होगींकभी शबनमी चांदनी से भरपूरखिला करेंगे यूँ हीये बेशुमार फूल इस आँगनकमरा यूँ ही सजा रहेगाकुछ मामूली और कीमती चीज़ों सेयूँ चलती रहेगी घड़ी टिक-टिकचलता रहेगा वक़्त अपनी चालधड़कता...
सुमन कपूर
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बुलबुलों से ख़्वाबों को दे दूँ पल भर की उड़ान जीने दूँ उनको,उनके हिस्से की कुछ जिन्दगी !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : जिन्दगी ख़्वाब
PRABHAT KUMAR
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अब भी समय है थोड़ा विचार कीजिये थोड़ा सा प्यार कर जिन्दगी संवार लीजियेजिन्दगी है ऐसी तूफ़ान यहाँ आते हैं ढहने-ढहाने के विचार यहाँ आते हैंघर के रूप रेखा से ही घर बचा लीजिये नींव के जतन से ही मकान बना लीजिये रिश्तों को संजोने के समय बहुत कम है नफरत की ऊँचाइयों में दूरिय...
सुमन कपूर
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जीये जाते हुए जाना व्यर्थ नहीं होता कुछ भी हर पल के हिस्से में लिखा होता है कुछ खास चाहा या अनचाहा आस के ढेर पर बैठ जीए जाते हैं हम अनेक पल हर आने वाले पल में तलाश करते हैं बस ख़ुशीभूल जाते हैं अपने गुनाह अपनी इच्छाओं की चाहते हैं पूर्ति  ताउम्र देखते हैं सपने...
सुमन कपूर
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दो बूँद अश्क पीकर पाक हुई रूह खाली दामन को काँटों से भर आबाद हुआ ज़िस्म आज फिर-जिंदगी की मज़ार पर अधूरे अरमानों ने सजदा किया !!सु-मन 
अपर्णा त्रिपाठी
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जाने कैसे बना देते हैं लोगह्र्दय भी पाषाण कापिघलना तो दूरएक लकीर तक नही खिंचती मनुष्यता की****************************कोई बना दे यंत्रजो पहचान सकेसच्चे और झूठे जज्बातकि बहुत लुटा चुकासहद्यता के मोतीचील कौंवों  में****************************वो क्या समझेंगेंमेर...
 पोस्ट लेवल : प्यार लोग जिन्दगी
अपर्णा त्रिपाठी
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जिन्दगी जीने के लियेइक पागलखाना चाहियेकोई बन्धन नही, रस्में नहीरीति नही, जाति नहीसफलताओं असफलताओं केतराजू मे तौला हुआ इंसा नहीमन से मन मिल जाय एक ऐसा पागल चाहिये जिन्दगी जीने के लियेइक पागलखाना चाहियेअपने ही जहाँ अपने ना हो पराये भी पर अपने से हो अदृश्य सी दीवारे न...