ब्लॉगसेतु

Sandhya Sharma
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प्रायवेट वार्ड नं. ३जिन्दगी/मौत के मध्यजूझती संघर्ष करती गूंज रहे हैं तो केवल गीत जो उसने रचे जा पहुंची हो जैसे सूनी बर्फीली वादियों मेंवहाँ भी अकेली नहीं साथ है तन्हाइयां यादों के बड़े-बड़े चिनारमरणावस्था में पड़ीअपनी ही प्रतिध्वनि सुन बहती जा रही है किसी हिमनद की तर...
Manav Mehta
407
जिंदगी दर्द में दफ़न हो गई इक रात,उदासी बिखर गई चाँदनी में घुल कर....!!चाँद ने उगले दो आँसू,ज़र्द साँसें भी फड़फड़ा कर बुझ गयी......!!इस दफा चिता पर मेरे-मेरी रूह भी जल उठेगी.........!!मानव मेहता 'मन'  
सुमन कपूर
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जिंदगी  की  मधुशाला  में छलकते हैं लम्हों के जाम घूँट भरते हैं रात और दिन ढलती है उम्र की एक शाम ऐ जिंदगी ! तुझे सलाम .....सु..मन 
 पोस्ट लेवल : मधुशाला जिन्दगी
राजीव कुमार झा
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.अगर  हम जिन्दगी को गौर से देखें तो यह एक कोलाज की तरह ही है. अच्छे -बुरे लोगों का साथ ,खुशनुमा और दुखभरे समय के रंग,और भी बहुत कुछ जो सब एक साथ ही चलता रहता है. कोलाज यानि ढेर सारी चीजों का घालमेल. एक ऐसा घालमेल जिसमें संगीत जैसी लयात्मकता हो ,...
 पोस्ट लेवल : कोलाज जिन्दगी
राजीव कुमार झा
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अपनों के बीच अपनापन तलाशता हूँ मकानों के बीच घर तलाशता हूँ इतना खो गया हूँ दुनियाँ की भीड़ में खुद में ही खुद को तलाशता हूँ|| आजकल आदमी का हुलिया बदल गया है अब आदमी के बीच आदमी को तलाशता हूँबहुत देखा है संबंधों की गहराई अब सम्बन्ध में सम्बन्ध तलाशता हूँ ||&nbs...
 पोस्ट लेवल : तलाश जिन्दगी
Rajendra kumar Singh
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१. ढूंढते रहे सुखो की कतरन उम्र गुजरी २. आशा की नाव जिन्दगी का सफर बहती नदी ३. यादों के फंदे अनसुलझे भेद मिट न पाए ४. नदी की धारा इच्छाओं का सफर कभी न रुके ५. घना अन्धेरा जी...
 पोस्ट लेवल : हाइकू haikoo जिन्दगी
राजीव कुमार झा
539
           तनहा कट गया जिन्दगी का सफ़र कई साल काचंद अल्फाज कह भी डालिए अजी मेरे हाल परमौसम है बादलों की बरसात हो ही जाएगीहंस पड़ी धूप तभी इस ख्याल पर फिर कहाँ मिलेंगे मरने के बाद हमसोचते ही रहे सब इस सवाल परखुश...
 पोस्ट लेवल : तनहा.सफ़र जिन्दगी
Manav Mehta
407
.......कभी गरम धूप सी चुभती है जिंदगी,कभी हसीं शाम सी कोमल लगती है जिंदगी....कभी मासूम सुलझी सी दिखती है जिंदगी,कभी उलझनों के जाले बुनती है जिंदगी......कभी लगता है कि ये अपनी ही हो जैसे,कभी गैरों सी अजनबी लगती है जिंदगी......कभी झरनों  सा तूफान लगती है जिंदगी,...
 पोस्ट लेवल : जिन्दगी
Manav Mehta
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ना राह ना मंजिल, कुछ ना पाया जिन्दगी मेंना जाने कैसा मोड़ ये आया जिन्दगी मेंतकलीफ,दर्द,चुभन,पीड़ा सब कुछ मिले इससेफ़कत एक खुशी को ही ना पाया जिन्दगी मेंवक़्त के मरहम ने सभी घाव तो भरे मेरेमगर जख़्मों से बने दाग को पाया जिन्दगी मेंऔरों की खुशी के लिए अपनी खुशी भूल ग...
 पोस्ट लेवल : दर्द जिन्दगी
सुशील बाकलीवाल
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उसको नहीं देखा हमने कभी पर इसकी जरुरत क्या होगी ? ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की मूरत क्या होगी ?माँ ही मन्दिर, माँ ही मूरत, माँ पूजा की थाली, बिन माँ के जीवन ऐसा, जैसे बगिया बिन माली ।माँ ने कभी हमें खुली छत के नीचे नहीं सुलाया और कुछ नहीं मिला तो...
 पोस्ट लेवल : माँ जीवनशैली. जिन्दगी