ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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उसको नहीं देखा हमने कभी पर इसकी जरुरत क्या होगी ? ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की मूरत क्या होगी ?माँ ही मन्दिर, माँ ही मूरत, माँ पूजा की थाली, बिन माँ के जीवन ऐसा, जैसे बगिया बिन माली ।माँ ने कभी हमें खुली छत के नीचे नहीं सुलाया और कुछ नहीं मिला तो...
 पोस्ट लेवल : माँ जीवनशैली. जिन्दगी
Manav Mehta
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इक ‘रेस’ सी लगी है मानोदौड़ते जाते हैं सब एक दूसरे से आगे –जाने सफर जिंदगी का मुकम्मल कब होगा !!मानव मेहता ‘मन’ 
 पोस्ट लेवल : रेस जिन्दगी
Manav Mehta
414
जब से बा-रंग हुई है जिंदगी,खुद को ढूँढता फिरता हूँ मैं...न जाने किस ओर गुम हो गया हूँ मैं,हो गर वाकिफ़ तो बताओ पहचान मेरी......कुछ इस तरह से है ; कि जिंदगी में,भर आया है इक प्यार का दरिया...डूब गया हूँ शायद मैं इसमे,या तैर रहा हूँ मौजे-सुखन में...नहीं एहसास अब कोईइ...
 पोस्ट लेवल : प्यार रंग जिन्दगी
सुमन कपूर
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ऐ मेरे नादान दिलअब तो संभल जासच का सामना करसपनों को भूल जा .....जिन्दगी-ऐ-सेहरा है येगहरा सागर नहीं हैअनबुझी सी है प्यासन तू इसमें डूब जाऐ मेरे नादान दिल अब तो ....सुलगती शमा है ये सिंदूरी शाम नहीं है पिघलता है जिस्म इसमेंन तू इसमें जल जा ऐ मेरे नादान दिल अब तो ......
 पोस्ट लेवल : सपना दिल जिन्दगी
Rajendra kumar Singh
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 हर तरफ छाया है अँधेरा दिखता नही सवेरा जिन्दगी में है बेरुखी का आलम हर डाल के पत्ते है सुर्खखो गया है मंजिलों के रास्तेनहीं रहा अब खुशियों से वास्ता जिन्दगी के इम्तिहाँ तोड़ रहें मेरा हौसला रुकने के कगार पर जिन्दगी के कामयाबी के कारवाँमेरे जज्बात उड़ रहें बिपरीत...
Rajendra kumar Singh
348
               बीते हुए पल को याद कर रोना अच्छा लगता है,              हम भी यादों में&nbsp...
 पोस्ट लेवल : फितरत गम गज़ल जिन्दगी
अपर्णा त्रिपाठी
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रेल की पटरी पर ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार से दौड रही थी, और घोष उस पटरी पर अपनी जिन्दगी की रफ्तार को खत्म करने के लिये उस पर अपनी पूरी रफ्तार से दौड रहा था, कि विघुत गति से एक हाथ अचानक आया और वो पटरी से अलग आ गया। घोष- आपने मुझे क्यों बचाया, मै जीना नही चाहता, मुझे...
 पोस्ट लेवल : जिन्दगी
दर्शनकौर धनोए
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 * जिन्दगी नहीं मिलेगी दुबारा *जिन्दगी मिलेगी नहीं दुबारा  यु ही कट जायेगी बिन सहारा   कभी पैसो का जुगाड़ करते हुए .. कभी यू ही खाली पेट सोते हुए ...जिन्दगी यू ही गुजर जायेगी ...कभी  बेटी की फ़ीस भरते हुए ....क...
 पोस्ट लेवल : घर जिन्दगी
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घाव है ताजा तनाव घट रही है ज़िन्दगी।आजकल तो काँच का घर बन गई है जिन्दगी।।कौन अपना कौन दुश्मन ये समझ आता नहीं।चील के हैं पंख फैले शुक यहाँ गाता नहीं।पत्थरों से दिल लगाकर पिस रही है जिन्दगी।।आदमी निज घर सजाता,गैर से मतलब नहीं।प्यार में भी अर्...
 पोस्ट लेवल : गीत जिन्दगी
सुमन कपूर
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तुम कहते थे ना !ये जिंदगी की बाहें मेरे अथाह प्यार को नहीं समेट पाएंगी .....आज देखो ना ! वही बाहें ताक रही हैं मुझे देख तन्हा अजनबी की तरह .....!!सु-मन