ब्लॉगसेतु

सुमन कपूर
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जीवन की राहों में कई बार कदम कुछ ऐसी राह पकड़ लेते हैं जिसकी कोई मंजिल नहीं होती या यूं कहो कि मंजिल सपना बन जाती है और वो राह स्वप्निल ।स्वप्निल राह जीवन की सच्चाई से अनभिज्ञ वो बढ़ती जा रही थी स्वप्निल रास्तों के गांव लेकर विचारों की छांव कदम पर आई ठोकर को विश्वा...
 पोस्ट लेवल : कुछ कतरे जिन्दगी के
सुमन कपूर
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 पोस्ट लेवल : कुछ कतरे जिन्दगी के
अनीता कुमार
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2007 में सुनिधि चौहान और श्रेया घोषाल का गाया एक गीत हमारे जहन पे अपना हक्क जमा के बैठ गया था और उसकी आधी अधूरी एक दो लाइन हर समय गुनगुनाहट के रूप में होठों पे रहती थी। कुछ इत्तेफ़ाक ऐसा बना कि हमने 'एक शाम मेरे नाम' ब्लोग वाले मनीश जी से इसकी फ़रमाइश की और उन्हों ने...
सुमन कपूर
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हसरत-ए-मंजिलन मैं बदला न तुम बदली न ही बदलीहसरत-ए-मंजिलफिर क्यूं कहते हैं सभीकि बदला सा सब नज़र आता हैशमा छुपा देती हैशब-ए-गम केअंधियारे कोवो समझते हैंकि हम चिरागों के नशेमन में जिया करते हैं ...............!!सु..मन 
 पोस्ट लेवल : कुछ कतरे जिन्दगी के
seema sachdeva
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दीवार से सटी बैठी सुजाता हाथ मे बन्धी पट्टी को एक़ टक घूरती हुई जैसे सुन्न सी ही हो गई पट्टी बान्धते -बान्धते उसने पाँच साल के बेटे रोहन को पास बुलाया ,पर रोहन ने साफ इन्कार कर दिया रोहन के मुँह से इन्कार सुजाता की जिन्दगी की सबसे बडी हार थीआँखो से अविरल बहती अश्र...
 पोस्ट लेवल : बिखरी जिन्दगी