ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
457
        एक महिला ने अपने पति का मोबाइल चेक किया तो फोन नंबर कुछ अलग ही तरीके से Save किये हुए दिखे, जैसे :-        आँखों का इलाज        होंठों का इलाज         दिल का इलाज &nbs...
सुशील बाकलीवाल
336
        इन दिनों वॉट्सएप पर एक मैसेज चलन में बना हुआ है जिसमें वर्षों बाद उन्नति के ऊंचे शिखर पर स्थापित एक छात्र अपने पूर्व प्रोफेसर से मिलने पर उसका धन्यवाद करते हुए कहता है कि सर आज मैंने जो कुछ भी हासिल किया है वो आपकी उस एक दिन की उदारता का...
सुशील बाकलीवाल
336
       अपने सामाजिक, पारिवारिक व कारोबारी जीवन में जो हम जो कुछ भी कार्य-व्यवसाय, सम्बन्ध, सम्पत्ति बना व कमा पाते हैं उनमें हमारी बहुत सी योग्यताओं व क्षमताओं के साथ एक और योग्यता सर्वोपरी स्थान हासिल करती है वह है हमारा रवैया या व्यव...
सुशील बाकलीवाल
457
      लडकी (प्रेम निवेदन करते लडके से)–      तूम पागल हो क्या ? मैं शादी शुदा हूँ, मेरा पति        है… और ऑफिस में एक बॉयफ्रेन्ड भी है ।      मेरा ex-boyfriend  मेरे पड़ोस में ही र...
सुशील बाकलीवाल
336
       बात कुछ पुरानी है, चिकित्सा के क्षेत्र में इन्दौर के एक सिद्धहस्त चिकित्सक के पास शहर से लगभग 100 कि. मी. दूर के किसी गांव से एक बीमार-वृद्ध महिला का पोस्टकार्ड आया, लिखा था- डॉ. साहेब मैं इस बीमारी के कारण भयंकर तकलीफ में अपना समय गुजार...
सुशील बाकलीवाल
336
       फेसबुक की उपयोगिता व इसका खुमार सामान्यजन के जीवन में जिस तेजी से फैल रहा है चलते-फिरते इंटरनेट युक्त स्मार्फोन के इस युग में ये किसी से छुपा नहीं है । नित नए मित्रों को बढाते चले जाने वाले इन मित्रों में कौन किस प्रवृत्ति और नियत से हमसे...
Sanjay  Grover
610
मज़े की बात है कि जब प्रशंसा में तालियां बजतीं हैं तब आदमी नहीं देखता कि तालियां बजानेवालों की भीड़ कैसे लोंगों के मिलने से बनी है !? उसमें पॉकेटमार हैं कि ब्लैकमेलर हैं कि हत्यारे हैं कि बलात्कारी हैं कि नपुंसक हैं कि बेईमान हैं कि.......लेकिन जैसे ही इसका उल्टा कुछ...
सुशील बाकलीवाल
336
     प्रायः सभी एकल भारतीय परिवारों में यदि बच्चे बहुत छोटे न रहे हों और मुख्य गृहिणी नौकरी-पेशा न हो तो एक समस्या अक्सर सामने आती है और वो है पति के काम पर व बच्चों के अपने स्कूल-कॉलेज निकल जाने के बाद सबके बारे में सोचते रहना और उनकी वापसी की...
अनीता सैनी
41
क्यों नहीं कहती झूठ है यह सब,  तम को मिटाये वह रोशनी हो तुम,   पलक के पानी से जलाये  दीप,  ललाट पर फैली स्वर्णिम आभा हो तुम,  संघर्ष से कब घबरायी ? मेहनत को लाद कंधे पर,  जीवन के हर पड़ाव पर...
Saransh Sagar
230
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); #चमकौर_का_युद्ध- जहां 10 लाख मुग़ल सैनिकों से लड़कर जीते थे मात्र 40 सिक्ख दुनिया के इतिहास में ऐसा युद्ध न कभी किसी ने पढ़ा होगा न ही कभही किसी ने सोचा होगा, जिसमे 10 लाख की फ़ौज का सामना महज 40 लोगों के...