ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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कोरोना वायरस       कुछ समय पूर्व मैंने अपने ब्लॉग स्वास्थ्य सुख में दि. 29 जनवरी 2020 को कोरोना वायरस से सम्बन्धित पोस्ट “Corona Virus कोरोना वायरस का कहर दिन-ब-दिन बढ रहा है...”  तब डाली थी जब इसका प्रसार शुरु हुआ था व सिर्फ चीन के वु...
kumarendra singh sengar
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इस समय कोरोना वायरस का हौआ इस कदर छाया हुआ है कि यदि किसी के बगल में पहुँच कर सामान्य सा खाँस दो या छींक दो तो अगला ऐसे देखेगा जैसे मौत को देख लिया हो. यदि किसी को जरा सा मौसमी जुकाम भी हो गया तो तुरंत मेडिकल के चक्कर में पड़ जायेगा. संभव है कि कोरोना एक भयंकर वाली...
सुशील बाकलीवाल
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      वैसे तो समूचि सृष्टि पर ही भगवान का साम्राज्य रहता है किंतु इस बार महाशिवरात्रि पर विख्यात ज्योतिर्लिंगों के संदर्भ में ऐसी रोचक जानकारी सामने आई है जिसे में आपके साथ भी साझा कर रहा हूँ ।Click & Read Also-अमृतफल आंवले की उपयोगिता व औषधीय गु...
सुशील बाकलीवाल
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सावधान रहें - सुरक्षित रहें.        जनसामान्य को ठगने व लूटने के जो नये-नये तरीके अपराधियों द्वारा ईजाद किये जा रहे हैं । उनमें जहाँ भी आपकी सावधानी हटी कि आपके साथ दुर्घटना घटी. और तब आपके जान व माल दोनों की सुरक्षा खतरे में पड सकती है । य...
सुशील बाकलीवाल
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विवाह संस्कार       हाल के दिनों में एक निमंत्रण ऐसा प्राप्त हुआ जिसमें विवाह संस्कार की निमंत्रण पत्रिका की सिर्फ फोटो इमेज ही वॉट्सएप पर प्राप्त हुई और न सिर्फ उस वॉट्सएप मैसेज में बल्कि दूसरे दिन टेलीफोन पर भी सम्बन्धित प्रेषक की ओर...
सुशील बाकलीवाल
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लक्ष्य पर ध्यान रखेंलक्ष्य पर ध्यान       बात चाहे अपने आस-पास की हो या दूरदराज के किसी क्षेत्र अथवा देश विदेश की, लेकिन जीवन में किसी उल्लेखनीय व्यक्ति की मुख्य उपलब्धियों तक पहुंचने की यात्रा को यदि ध्यान से देखा-समझा जावे तो यह बात अवश्य सामन...
 पोस्ट लेवल : जीवनशैली
सुशील बाकलीवाल
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         हिंदू धर्म में यह परम्परा है कि किसी भी मंदिर में दर्शन के बाद बाहर आकर मंदिर की पेढी या ओटले पर दो मिनिट तो बैठना ही चाहिये । क्या आप जानते हैं कि इस परम्परा के पीछे कारण क्या है ?          &nbsp...
सुशील बाकलीवाल
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      पिछले दिनों बहुचर्चित निर्भया केस में कोर्ट रुम के एक विशेष दृश्य के बारे में समाचारपत्रों में पढा कि मुजरिम को फांसी दी जाए या मुजरिम की फांसी को टाल दिया जाए इस विषय पर दो माताएं न्यायाधीश महोदय के समक्ष अपनी-अपनी भरी आँखों से समुचित न्याय की...
सुशील बाकलीवाल
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      कुछ दिनों पूर्व हमारे शहर में 5/- रु. के अच्छे-भले नोट लोगों ने लेना बंद कर दिया । कारण क्या हुआ ?  जवाब किसी के पास भी नहीं, बस हम नहीं लेंगे । अब आप बैठे रहो अपने उन पांच रुपये के करंसी नोटों को लेकर, नहीं चलेंगे याने नहीं चलेंगे । पहले...
सुशील बाकलीवाल
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        वर्तमान समय के प्रतिस्पर्धी माहौल में हर माता-पिता अपने बच्चे को जीवन की दौड में आगे बढाने के लिये प्राण-प्रण से लगे दिखाई देते हैं इसके लिये आवश्यक खर्च की पूर्ति करने के लिये वे घर व बाहर के मोर्चे पर लगातार अपनी सामर्थ्य से अधिक मेहनत...