ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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      पिछले दिनों बहुचर्चित निर्भया केस में कोर्ट रुम के एक विशेष दृश्य के बारे में समाचारपत्रों में पढा कि मुजरिम को फांसी दी जाए या मुजरिम की फांसी को टाल दिया जाए इस विषय पर दो माताएं न्यायाधीश महोदय के समक्ष अपनी-अपनी भरी आँखों से समुचित न्याय की...
सुशील बाकलीवाल
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      कुछ दिनों पूर्व हमारे शहर में 5/- रु. के अच्छे-भले नोट लोगों ने लेना बंद कर दिया । कारण क्या हुआ ?  जवाब किसी के पास भी नहीं, बस हम नहीं लेंगे । अब आप बैठे रहो अपने उन पांच रुपये के करंसी नोटों को लेकर, नहीं चलेंगे याने नहीं चलेंगे । पहले...
सुशील बाकलीवाल
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        वर्तमान समय के प्रतिस्पर्धी माहौल में हर माता-पिता अपने बच्चे को जीवन की दौड में आगे बढाने के लिये प्राण-प्रण से लगे दिखाई देते हैं इसके लिये आवश्यक खर्च की पूर्ति करने के लिये वे घर व बाहर के मोर्चे पर लगातार अपनी सामर्थ्य से अधिक मेहनत...
सुशील बाकलीवाल
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      अभी कुछ समय पूर्व एक रेलयात्रा के दौरान सामने की बर्थ पर बैठी एक माँ और उसकी बच्ची में कुछ रोचक सा देखने को मिला और वो यह कि उसकी माँ जब मेरी पत्नी सहित अन्य महिलाओं से बात कर रही थी तब उसकी छोटी बच्ची उसकी उम्र की बाल-कहानियां पढ रही थी । उसकी...
सुशील बाकलीवाल
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       हम सभी के जीवन में कभी अकस्मात कुछ परिस्थितियां ऐसी भी बन जाती है, जब हमें तत्काल किसी अपने की,  विशेष सुरक्षा की या कानूनी मदद की आवश्यकता आ पडती है । किंतु सामान्य तौर पर उस वक्त हम न सिर्फ अकेले होते हैं,  बल्कि इस स्थित...
सुशील बाकलीवाल
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       हम सभी के जीवन में कभी अकस्मात कुछ परिस्थितियां ऐसी भी बन जाती है, जब हमें तत्काल किसी अपने की, विशेष सुरक्षा की या कानूनी मदद की आवश्यकता आ पडती है । किंतु सामान्य तौर पर उस वक्त हम न सिर्फ अकेले होते हैं,  बल्कि इस स्थिति में भी नह...
सुशील बाकलीवाल
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       हमारे जीवन में कभी भी अकस्मात कुछ परिस्थितियां ऐसी बन जाती है,  जब हमें तत्काल किसी अपने की, विशेष सुरक्षा की या कानूनी मदद की आवश्यकता आन पडती है, और सामान्य तौर पर उस वक्त हम न सिर्फ अकेले होते हैं,  ब...
सुशील बाकलीवाल
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       हम सभी के जीवन में कभी अकस्मात कुछ परिस्थितियां ऐसी भी बन जाती है, जब हमें तत्काल किसी अपने की, विशेष सुरक्षा की या कानूनी मदद की आवश्यकता आ पडती है । किंतु सामान्य तौर पर उस वक्त हम न सिर्फ अकेले होते हैं,  बल्कि इस स्थिति में भी नह...
सुशील बाकलीवाल
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          किसी गांव में एक गाँव में एक व्यक्ति के पास 19 ऊंट थे । एक दिन उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी । मृत्यु के पश्चात वसीयत पढ़ी गयी ।  जिसमें लिखा था - मेरे 19 ऊंटों में से आधे मेरे बेटे को, 19 ऊंटों में से एक चौथाई मेरी बेटी को और 1...
सुशील बाकलीवाल
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        एक महिला ने अपने पति का मोबाइल चेक किया तो फोन नंबर कुछ अलग ही तरीके से Save किये हुए दिखे, जैसे :-        आँखों का इलाज        होंठों का इलाज         दिल का इलाज &nbs...