कभी-कभी बात समझ आती है तो मैं सही सोचता हूँ। लेकिन यह तब होता है जब मैं मौत के करीब होता हूँ। सबसे परेशान होता हूँ। मैं ही मैं होता हूँ।लेकिन बला टलते ही भूल जाता हूँ कि क्या सोचा था।जब परेशानियां हावी होती हैं, सब हाय-हाय कर रहे होते हैं। मैं खाट पर होता हूँ। सोच...
 पोस्ट लेवल : जीवन का सच चिंतन