ब्लॉगसेतु

संजीव तिवारी
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लेखन की दुनियां में बस्‍तर सदैव लोगों के आर्कषण का केन्‍द्र रहा है। अंग्रेजी और हिन्‍दी में उपलब्‍ध बस्‍तर साहित्‍य के द्वारा संपूर्ण विश्‍व नें बस्‍तर की प्राकृतिक छटा और निच्‍छल आदिवासियों को समझने-बूझने का प्रयास किया है। साठ के दसक में छत्‍तीसगढ़ के इस भूगोल को...
संजीव तिवारी
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'जनजातीय समुदाय के उत्‍थान और विकास का कार्य ऐसे लोगों के हाथों होना चाहिए, जो उनके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्‍य और सामाजिक व्‍यवस्‍था को पूरी सहानुभूति के साथ समझ सकें.' गोंड जनजाति के आर्थिक जीवन पर शोध करते हुए शोध के गहरे निष्‍कर्ष में डॉ. इन्‍द्रजीत सिंह जी नें अपने...
संजीव तिवारी
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7 मार्च . जयंती पर विशेषआज कलम पकडते ही तुरत लिखो तुरत छपो की मंशा लेकर लेखन करने वालों की फौज बढते जा रही है. किन्तु हमारे अग्रपुरूषों नें लेखन के बावजूद अपने संपूर्ण जीवन में छपास की आकांक्षा को दबाये रखा है. उन्होनें अपनी पाण्डुलिपियों को बारंबार स्वयं पढा है उस...
संजीव तिवारी
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छत्तीसगढी भाषा साहित्य के इतिहास पर नजर दौडानें मात्र से  बार बार एक नाम छत्तीसगढी कविता के क्षितिज पर चमकता है. वह है  छत्तीसगढी भाषा के ख्यात कवि कोदूराम दलित जी का.  कोदूराम दलित जी ने छत्तीसगढी कविता को एक नया आयाम दिया और इस जन भाषा को हिन्दी कव...
संजीव तिवारी
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1 सितम्‍बर 1923 को बैजनाथपारा, रायपुर, छत्‍तीसगढ में जन्‍में हबीब अहमद खान के पिता हाफिज मुहम्‍मद हयात खान माता नजीरून्निशा बेगम थीं । रायपुर से चलते हुए इस पथिक नें पूरी दुनियॉं नापी, दुनियां के लगभग सत्रह देशों में अपनी नाट्य प्रस्‍तुतियां दी और ढेरों सम्‍मान एवं...
संजीव तिवारी
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पिछले पोस्‍ट में प्रेम साईमन जी को अर्पित हमारी श्रद्धांजली  एवं बडे भाई शरद कोकाश जी के अनुरोध को पढकर ख्‍यात व्‍यंगकार, उपन्‍यासकार आदरणीय विनोद साव जी नें भी प्रेम साइमन जी को याद किया और हमें यह लेख प्रेषित किया - मैंने प्रेम साइमन का कोई नाटक नहीं दे...
संजीव तिवारी
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छत्‍तीसगढ को संपूर्ण देश के पटल पर दूरदर्शन एवं नाटकों के माध्‍यम से परिचित कराने में मुख्‍य भूमिका निभाने वाले चर्चित पटकथा लेखक प्रेम साइमन का विगत दिनों 64 वर्ष की उम्र में देहावसान हो गया। छत्‍तीसगढ के शेक्‍सपियर कहे जाने वाले प्रेम सायमन फक्‍कड किस्‍म के जिन्‍...
संजीव तिवारी
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दान की परम्‍परा छत्‍तीसगढ में सदियों से रही है। वैदिक काल में दानवीर राजा मोरध्‍वज की कर्मस्‍थली इस प्रदेश में अनेकों दानवीरों नें जन्‍म लिया है । इन्‍हीं दानवीरों में दतरेंगा, भाटापारा में जन्‍में दाउ कल्‍याण सिंह का नाम संपूर्ण प्रदेश में आदर के साथ लिया जाता है...
संजीव तिवारी
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देश के अन्‍य प्रदेशों के लोक में प्रचलित लोकनाट्यों की परम्‍परा में छत्‍तीसगढी लोक नाट्य नाचा का विशिष्‍ठ स्‍थान है । नाचा में स्‍वाभाविक मनोरंजन तो होता ही है साथ ही इसमें लोक शिक्षण का मूल भाव समाहित रहता है जिसके कारण यह जन में रच बस जाता है । वाचिक परम्‍परा में...
संजीव तिवारी
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छत्‍तीसगढी लोक नाट्य विधा तारे नारे के संरक्षक छत्‍तीसगढ के ठेठ जडों से भव्‍य नागरी रंगमंचों तक सफर तय करने वाले रंगमंच के ऋषि हबीब तनवीर को कौन नहीं जानता उन्‍होंनें न केवल छत्‍तीसढी संस्‍कृति और लोक शैलियों को आधुनिक नाटकों के रूप में संपूर्ण विश्‍व में फैलाया वर...