ब्लॉगसेतु

अजय  कुमार झा
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इस जीवन में यूं तो हर पल नया होता है और ये इस मायने में भी होता है कि हमारे आसपास कुछ कुछ न भी हो तो भी जो बीत जाता है वो स्वयमेव पुराना हो जाता है और स्वतः ही सब कुछ नवीन यानि नया हो जाता है | और ये उसी तरह से जरूरी भी है जिस तरह से कुछ नया याद रखने के लिए पुराना...
अजय  कुमार झा
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कुछ दिनों पूर्वसमय करीब शाम के आठ बजेस्थान : पूर्व दिल्ली की कोई गलीपुत्र आयुष को जुडो कराटे की प्रशिक्षण कक्षा से वापस लेकर लौट रहा हूँ | तीन दिनों से लगातार हो रही बूंदाबांदी ने सड़क को घिचपिच सा कर दिया है | अचानक ही स्कूटी की तेज़ लाईट में सड़क के बीचों बीच कोई औं...
अजय  कुमार झा
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आप कभी छत पर सोए हैं ???रात में जब आप छत पर आकाश की ओर मुंह करके ऊपर अनंत की ओर देखने की कोशिश करें तो एक अद्भुत संसार ,सोचता हूँ उसे संसार भी कहना ठीक होगा क्या ,मगर ये जो आदि से लेकर अनंत तक दिखाई देता है वो सिर्फ एक अनुभूति है । अक्सर ये कहते हुए सुना है कि मरने...