ब्लॉगसेतु

Krishna Kumar Yadav
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मेरे गीतों में आकर के तुम क्या बसे,गीत का स्वर मधुर माधुरी हो गया।अक्षर अक्षर सरस आम्रमंजरि हुआ,शब्द मधु की भरी गागरी हो गया।तुम जो ख्यालों में आकर समाने लगे,गीत मेरे कमल दल से खिलने लगे।मन के भावों में तुमने जो नर्तन किया,गीत ब्रज की भगति- बावरी हो गया। ...मेरे गी...
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'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर  आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती सुभाष प्रसाद गुप्ता की  कविताएं. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...जब से मैं रंगा हूँ तेरे प्रेम रंग में रंग रसिया,मेरा तन मन सब  इंद्रधनुषी होने  लगा हैIजब से मिला है धरकन तेरे...
Krishna Kumar Yadav
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हाइकु हिंदी-साहित्य में तेजी से अपने पंख फ़ैलाने लगा है. कम शब्दों (5-7-5)में मारक बात. भारत में प्रो० सत्यभूषण वर्मा का नाम हाइकु के अग्रज के रूप में लिया जाता है. यही कारण है कि उनका जन्मदिन हाइकु-दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज 4 दिसम्बर को उनका जन्म-दिवस है, अ...
Krishna Kumar Yadav
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'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती कृष्ण कुमार यादव जी की एक कविता 'तुम और चाँद'.आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...रात का पहरजब मैं झील किनारेबैठा होता हूँचाँद झील में उतरकरनहा रहा होता हैकुछ देर बादचाँद के साथएक और चेहरामिल जाता हैवह...
Krishna Kumar Yadav
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तेरी आँखों के ये आँसूं,मेरे दिल को भिगोते हैं,तुझे याद कर-कर हम भी,रात-रात भर रोते हैं,बिन तेरे चैन कहाँ,बिन तेरे रैन कहाँ,जाएँ तो जाएँ कहाँ,हर जगह तेरा निशाँ,तेरे लब जब थिरकते हैं,बहुत हम भी मचलते हैं,चाहते हैं कुछ कहना,मगर कहने से डरते हैं॥कितने हैं शायर यहाँ,कित...
Krishna Kumar Yadav
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शर्मा गई चांदनी जब रूख से नकाब हट देखाइस ज़मीन पर भी एक सुंदर सा चाँद खिला देकाफ़ैल गयी हर जगह रोशनी रोशन हो उठी फिजांबड़े आश्चर्य से सबने हुश्न -ऐ- चिराग जला देखाछिपता फिर रहा चाँद बादलों में इधर से उधरइस चाँद के आगे सबने उस चाँद को बुझा- बुझा देखाछाई रही मस्ती मद...
Krishna Kumar Yadav
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मैं जानता हूँ की ये सफ़र हमारा साथ कहीं छुड़ा देगा,पर दिल क्यूँ चाहता है की तुम दो कदम साथ चलो?मैं जानता हूँ सुबह का सूरज मुझे नींद से जगा देगा,पर दिल क्यूँ चाहता है तुम इन आँखों में रात करो?मैं जानता हूँ की प्यासा ही रह जाऊंगा मैं शायद,पर दिल क्यूँ चाहता है तुम मे...
Krishna Kumar Yadav
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'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती सूरज पी.सिंह की इक छोटी सी कविता। आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...तुम होते गमले की पौधऔर जो मैं कहींमाटी की ऊर्वरा बनतुम्हारी जड़ों में पड़ा होता,तब भी क्या तुम मुझेअपने भीतर आने से रोक देते?..और, जो...
Krishna Kumar Yadav
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'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती अनामिका घटक की कविता। आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...इस सूने कमरे में है बसमैं और मेरी तन्हाईदीवारों का रंग पड गया फीकाथक गयी ऑंखें पर वो न आयीछवि जो उसकी दिल में समायादीवारों पर टांग दियातू नहीं...
Krishna Kumar Yadav
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'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता जितेन्द्र ‘जौहर’ का 'प्रेम-पत्र' . आपकी प्रतिक्रियाओं और प्रोत्साहन का यथावत इंतजार रहेगा...आपका प्रेम-पत्र...जैसे किसी वैभवशाली ‘अभाव-महल’ मेंआकुल-व्याकुलउर्मिला के समक्षकिसी लक्ष्मण काभावमय गृहागमन !आ...