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महेश कुमार वर्मा
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दिवाली का पर्व बीत गया और अब महापर्व छठ निकट आ गया है। आपको याद होगा पिछले वर्ष छठ पर्व के उपरांत पशुओं ने कवि के रचना के माध्यम से मनुष्य को मुर्ख की संज्ञा देता हुए शाप दिया था कि इनका व्रत निष्फल जाएगा। क्या हम मनुष्य पशुओं के शाप से मुक्त होंगे?हम मनुष्य को सब...
महेश कुमार वर्मा
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आज विजया दशमी का पर्व है। इसी दिन लोग दशहरा पर्व का समापन भी करते हैं। कहा जाता है कि दस सिरों वाला रावण इसी दिन हारा था यानि भगवान राम के हाथों मारा गया था। और इसी के यादगार में लोग इस दिन रावण का पुतला जलाते हैं और खुशियाँ मानते हैं। पर लोग यह भूल जाते हैं क...
महेश कुमार वर्मा
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नमस्कार।आज से शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया है। और इसके साथ ही दशहरा व दुर्गा पूजा का पर्व का भी शुभारंभ होगया। इस खुशी के माहौल में और भी खुशी आ गयी कि दो दिनों के बाद आपसी प्रेम व भाईचारा का पवित्र पर्व ईदहै। इन खुशी व पवित्र पर्व के अवसर पर आम जनों से मेरा आग्रह...
महेश कुमार वर्मा
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तीन भिखारी   हाथ में कटोरा लिए आधा कपड़ा फटे हुए आधा तन उघड़े हुए एक हाथ में लाठी लिए झुकी कमर से चल रहे लोगों से हैं कह रहे दे दो बाबू दे दो इस बुढ़े को दे दो तू एक पैसे देगा वो दस लाख देगा दे दो बाबू दे दो दे दो बाबू दे दो उसे देख कई चलने वाले सिक...
महेश कुमार वर्मा
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देख मुर्ख मनुष्य को करता है ये छठ पर्व चाहता है हजारों कामना छठ करने के लिए कितनी सारी व्यवस्था करता है भगवान से हजारों कामना चाहता है खरना करता है उपवास रहता है नदी जाता है सूर्य को अर्ध्य देता है ताकि उसकी मनोकामना पुरी हो पर उसका नहाय-खाय खरना, उपवास व सूर्य को...
महेश कुमार वर्मा
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तुम मुझे क्यों मारना चाहते होमैं बेटी बनकर जन्म ले रही हूँ इसीलिएमेरे बेटी होना से तुम क्यों घबराते होदहेज़ के कारणया बेटी को पराया धन समझते होपर तुम्हारा सोचना व्यर्थ हैबेटी पराया धन नहीं हैतुम मुझे उचित शिक्षा देनामेरे साथ पराये का व्यव्हार न करनातब तुम देखोगे कि...
महेश कुमार वर्मा
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भ्रूण हत्या एक जघन्य अपराध है व यह मानव जाति के लिए कलंक है। हरेक सफलता के पीछे एक नारी का हाथ होता है और जब हम उस नारी जाति के भ्रूण को जन्म से पहले ही नष्ट कर देते हैं तो इस मनुष्य के लिए इससे बड़ी कलंक की बात और क्या हो सकती है? धिक्कार है उसको जो किसी भी प्रकार...
महेश कुमार वर्मा
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जी हाँ, यह प्रश्न विचारनिए है कि चमड़ा से निर्मित वस्तु का उपयोग कहाँ तक उचित है? इस बात में कोई दो राय नहीं कि चमड़ा निर्मित वस्तु का उपयोग जीव हत्या को बढावा देना है। (क्यों?)हम चमड़ा निर्मित वस्तु का उपयोग करते हैं आख़िर तब ही तो बाज़ार में इसकी मांग होती है और इसी...
महेश कुमार वर्मा
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आत्म-चिंतन: वह बकरा ने आपको क्या किया था?---------------मंथन : विजया दशमी और मांसाहार भोजनमांसाहार भोजन : उचित या अनुचितशाकाहारी भोजन : शंका समाधानhttp://groups.google.co.in/group/hindibhasha/browse_thread/thread/dde9e2ce361496a0
महेश कुमार वर्मा
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इंसान नहीं हैवान हैं हममारते बेकसूर जीव को औरभरते अपना पेट हैं हमइंसान नहीं हैवान हैं हमइंसान नहीं हैवान हैं हममत कहो हमें सर्वाधिक बुद्धिमान व विवेकशील प्राणीयहाँ हम रोज करते हैं बेईमानीकरते हैं अत्याचारहोती है बलात्कारदेते हैं रिश्वतकोई नहीं करता है बहिष्कारएक दि...