ब्लॉगसेतु

महेश कुमार वर्मा
348
दिवाली का पर्व बीत गया और अब महापर्व छठ निकट आ गया है। आपको याद होगा पिछले वर्ष छठ पर्व के उपरांत पशुओं ने कवि के रचना के माध्यम से मनुष्य को मुर्ख की संज्ञा देता हुए शाप दिया था कि इनका व्रत निष्फल जाएगा। क्या हम मनुष्य पशुओं के शाप से मुक्त होंगे?हम मनुष्य को सब...
महेश कुमार वर्मा
348
आज विजया दशमी का पर्व है। इसी दिन लोग दशहरा पर्व का समापन भी करते हैं। कहा जाता है कि दस सिरों वाला रावण इसी दिन हारा था यानि भगवान राम के हाथों मारा गया था। और इसी के यादगार में लोग इस दिन रावण का पुतला जलाते हैं और खुशियाँ मानते हैं। पर लोग यह भूल जाते हैं क...
महेश कुमार वर्मा
348
नमस्कार।आज से शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया है। और इसके साथ ही दशहरा व दुर्गा पूजा का पर्व का भी शुभारंभ होगया। इस खुशी के माहौल में और भी खुशी आ गयी कि दो दिनों के बाद आपसी प्रेम व भाईचारा का पवित्र पर्व ईदहै। इन खुशी व पवित्र पर्व के अवसर पर आम जनों से मेरा आग्रह...
महेश कुमार वर्मा
348
तीन भिखारी   हाथ में कटोरा लिए आधा कपड़ा फटे हुए आधा तन उघड़े हुए एक हाथ में लाठी लिए झुकी कमर से चल रहे लोगों से हैं कह रहे दे दो बाबू दे दो इस बुढ़े को दे दो तू एक पैसे देगा वो दस लाख देगा दे दो बाबू दे दो दे दो बाबू दे दो उसे देख कई चलने वाले सिक...
महेश कुमार वर्मा
348
देख मुर्ख मनुष्य को करता है ये छठ पर्व चाहता है हजारों कामना छठ करने के लिए कितनी सारी व्यवस्था करता है भगवान से हजारों कामना चाहता है खरना करता है उपवास रहता है नदी जाता है सूर्य को अर्ध्य देता है ताकि उसकी मनोकामना पुरी हो पर उसका नहाय-खाय खरना, उपवास व सूर्य को...
महेश कुमार वर्मा
348
तुम मुझे क्यों मारना चाहते होमैं बेटी बनकर जन्म ले रही हूँ इसीलिएमेरे बेटी होना से तुम क्यों घबराते होदहेज़ के कारणया बेटी को पराया धन समझते होपर तुम्हारा सोचना व्यर्थ हैबेटी पराया धन नहीं हैतुम मुझे उचित शिक्षा देनामेरे साथ पराये का व्यव्हार न करनातब तुम देखोगे कि...
महेश कुमार वर्मा
348
भ्रूण हत्या एक जघन्य अपराध है व यह मानव जाति के लिए कलंक है। हरेक सफलता के पीछे एक नारी का हाथ होता है और जब हम उस नारी जाति के भ्रूण को जन्म से पहले ही नष्ट कर देते हैं तो इस मनुष्य के लिए इससे बड़ी कलंक की बात और क्या हो सकती है? धिक्कार है उसको जो किसी भी प्रकार...
महेश कुमार वर्मा
348
जी हाँ, यह प्रश्न विचारनिए है कि चमड़ा से निर्मित वस्तु का उपयोग कहाँ तक उचित है? इस बात में कोई दो राय नहीं कि चमड़ा निर्मित वस्तु का उपयोग जीव हत्या को बढावा देना है। (क्यों?)हम चमड़ा निर्मित वस्तु का उपयोग करते हैं आख़िर तब ही तो बाज़ार में इसकी मांग होती है और इसी...
महेश कुमार वर्मा
348
आत्म-चिंतन: वह बकरा ने आपको क्या किया था?---------------मंथन : विजया दशमी और मांसाहार भोजनमांसाहार भोजन : उचित या अनुचितशाकाहारी भोजन : शंका समाधानhttp://groups.google.co.in/group/hindibhasha/browse_thread/thread/dde9e2ce361496a0
महेश कुमार वर्मा
348
इंसान नहीं हैवान हैं हममारते बेकसूर जीव को औरभरते अपना पेट हैं हमइंसान नहीं हैवान हैं हमइंसान नहीं हैवान हैं हममत कहो हमें सर्वाधिक बुद्धिमान व विवेकशील प्राणीयहाँ हम रोज करते हैं बेईमानीकरते हैं अत्याचारहोती है बलात्कारदेते हैं रिश्वतकोई नहीं करता है बहिष्कारएक दि...