ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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 जैसे एक आदमी होते हैं कई आदमी उसी तरह एक युग में होते हैं कई युग. कलयुग के इस सेल्फी युग में जब व्यक्ति फोन खरीदने निकलता है तब उसमें फोन की नहीं, उस फोन में लगे कैमरे की खूबियाँ देखता है.. फोन की साऊन्ड क्वालिटी में भले ही थोड़ी खड़खड़ाहट हो, चाहे जगह जगह सिगनल...
समीर लाल
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 जिन्दगी का सफ़र भी कितना अजीब है. रोज कुछ नया देखने या सुनने को मिल जाता है और रोज कुछ नया सीखने. पता चला कि दफ्तर की महिला सहकर्मी का पति गुजर गया. बहुत अफसोस हुआ. गये उसकी डेस्क तक. खाली उदास डेस्क देखकर मन खराब सा हो गया. आसपास की डेस्कों पर उसकी अन्य करीब...
समीर लाल
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 किसी ने कहा है कि अगर ससम्मान जीवन जीना है तो वक्त के साथ कदमताल कर के चलो अर्थात जो प्रचलन में है, उसे अपनाओ वरना पिछड़ जाओगे. अब पार्ट टाईम कवि हैं, तो उसी क्षेत्र में छिद्रान्वेषण प्रारंभ किया. ज्ञात हुआ कि वर्तमान प्रचलन के अनुसार, बड़ा साहित्यकार बनना है त...
समीर लाल
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 तिवारी जी का कहना है कि आजकल वो फैशनेबल हो गए हैं। अचरज बस इस बात का है कि तिवारी जो पहले भी इसी लिबास में रहते थे और आज भी, चलते भी उसी साइकिल पर हैं पिछले कई दशकों से, फिर फैशनबेल होने से क्या फरक पड़ा? जिज्ञासुओं का पाचन तंत्र हमेशा से कमजोर माना गया है। को...
समीर लाल
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पहनते तो अब भी वो धोती कुरता ही हैं और मुँह में पान भी वैसे ही भरे रहते हैं मगर कहते हैं कि  अब हम एडवान्स हो गए हैं। साथ ही वह यह हिदायत भी दे देते कि हम जैसे टुटपुंजिया और बैकवर्ड लोग उनसे कोई फालतू बहस न करें।  नये नये रईस, नये नये नेता और नये नये एडव...
समीर लाल
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पिछले कई दशकों में बहुत कुछ बदला मगर जो न बदला वो है नेताओं का किरदार और दूसरा बारात में बजते बैंड पर दो गाने – पहला ‘आज मेरे यार की शादी है’ और दूसरा ‘नागिन धुन’। तमाम गाने बज जायें मगर जब तक ये दो गाने न बजें, तब तक बारात मुकम्मल नहीं मानी जाती। आज घंसु की बारात...
समीर लाल
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 दिवाली आ रही है। सभी साफ सफाई और रंग रोगन में लगे हैं। तिवारी जी भी दो दिन से चौराहे पर नजर नहीं आ रहे। पता चला कि साफ सफाई में व्यस्त हैं। कुछ लोगों का व्यक्तित्व ऐसा होता है जिनके लिए कहावत बनी है कि ‘कनुआ देखे मूड पिराए, कनुआ बिना रहा न जाए’ यानि कि वो दि...
समीर लाल
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  पान की दुकान पर मुफ्त अखबार के अध्ययन से ज्ञान प्राप्त करने को अगर विश्व विद्यालय किसी संकाय की मान्यता देता तो तिवारी जी को निश्चित ही डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा जाता। डॉक्टरेट बिना मिले भी वह पान की दुकान पर प्रोफेसर की भूमिका का निर्वहन तो कर ही रहे थे। ज...
समीर लाल
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 सबके अपने अपने शौक होते हैं। उसे सम्मान समारोह देखने का शौक था। मौका लगा तो व्यक्तिगत तौर पर हाजिर हो कर अन्यथा टीवी पर। यहाँ तक कि अखबार में भी सम्मान समारोहों की रिपोर्ट देख कर वो गदगद हो जाता। फिर वो चाहे उसके मोहल्ले का कोई आशु कवि सम्मानित किया जा रहा हो...
समीर लाल
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  आज तिवारी जी सुबह सुबह चौक से दाढ़ी मूंछ सेट करवा कर और बाल रंगवा कर जल्दबाजी में  घर लौटते दिखे। साथ ही धोबी से प्रेस करवा कर अपना कुर्ता भी लिए हुए थे। मैंने उन्हें प्रणाम करके जब चाय पीने की पेशकश की तो वो कहने लगे कि ये चाय वाय के ठेले पर बैठ कर गप्प...