ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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उस रोज सरकारी अधिकारी घंसु को साथ ले गये थे सुबह सुबह. घंसु को मंहगे साबुन से नहला धुला कर एक कमरे में कैमरे के सामने कुर्सी पर बैठा दिया गया. मंत्री जी आये और उसके सामने एक छोटी चौकी लगाकर बैठ गये. फिर मंत्री जी ने घंसु के धुले हुए पैर फिर से धोये, पोंछे और फिर उस...
समीर लाल
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कक्षा ६ में मेरा सहपाठी राजू मेरा पड़ोसी बना क्लास में. वो निहायत बदमाश लेकिन चेहरे से एकदम दीन हीन और निरिह सा दिखने वाला. दिन भर तरह तरह की आवाज निकालता और सामने बैठे लड़कों की पीठ पर मेरे पैन से स्याही छिड़क देता. हरी स्याही का पैन सिर्फ मेरे पास था तो वो लड़के समझत...
समीर लाल
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'दिल-ए-बेरहम, माल-ए-मुफ्त, उड़ाये जा दिल खोल के'ये बात बिल्कुल सटीक बैठती हैं हमारे देश में दी जाने वाली सलाहों के मुफ्तिया सलाहकारों पर. सलाहों का आकार प्रकार मौके के अनुसार बदलता रहता है मगर उड़ाई सदा ही जाती है. इन सलाहों का विशिष्ट चरित्र होता है; यह सलाह बिना मा...
समीर लाल
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भारत में वेलेंटाईन डे का प्रचलन कब से आया यह तो ठीक ठीक पता नहीं. इतना जरुर याद है जब बीस साल पहले भारत छोड़ा था तब तक कम से कम हमारे शहर, जो महानगर तो नहीं था किन्तु फिर भी बड़ा शहर तो था ही, में नहीं आया था. हमारे समय में तो खैर बीबी को भी ’आई लव यू’ बोलने का रिवाज...
समीर लाल
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धरना! धरना!! धरना!! आजकल जहाँ सुनो, बस यही सुनाई दे रहा है.वैसे तो नित नये नये धरने कभी जंतर मंतर पर, कभी रामलीला मैदान पर, तो कभी राजघाट पर और कोई जगह न मिले तो कलेक्ट्रेट के सामने, होते ही रहते हैं. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, किसान आदि धरने पर बैठ भी जायें तो भी न तो म...
देवेन्द्र पाण्डेय
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इसमें कोई शक नहीं कि पुरुष अपने कर्मों से महान बनता है। पुरुष से महापुरुष बनने के लिए उसे कई सत्कर्म करने पड़ते हैं। महापुरुष बनने के लिए पुरुष को सबसे बड़ा सत्कर्म तो यह करना पड़ता है कि उसे अपना पुरुष तत्व त्यागना पड़ता है। पुरुषत्व त्यागने के लिए पुरुष को स्त्री से...
समीर लाल
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पहले के जमाने में एक बार आप महापुरुष घोषित हो लिए तो फिर सर्वमान्य एवं सर्वकालिक महापुरुष होते थे. मरणोपरांत महापुरुष के नाम पर सड़क का नाम रखा जाता था और उनकी मूर्ति चौराहे पर लगा दी जाती थी. हालांकि महापुरुषों की चौराहे पर लगी मूर्ति पर तब कबूतर आकर बैठते और बीट क...
समीर लाल
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तुरुप का पत्ता याने ट्रम्प कार्ड जिसमें किसी भी हाथ को जीतने की क्षमता होती है और सभी कार्डों में सबसे बड़ा माना जाता है.बचपन में जब ताश खेला करते थे और अगर तुरुप का पत्ता हाथ लग जाये, तो क्या कहने. चेहरे पर विश्व विजेता वाले भाव आ जाते थे.शायद इसीलिए इसे ट्रम्प कार...
समीर लाल
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मकर संक्रांति के नाम सुनते ही खिचड़ी की याद आ जाती है. यूँ तो बचपन में जब बीमार पड़ते थे तब भी खिचड़ी ही खाने को मिलती थी. बुरा बीमार होने से ज्यादा इस बात का लगता था कि बाकि के सारे लोग तो घर में पराठा सब्जी और पुलाव दबा रहे हैं और हमको खिचड़ी मिल रही है. अपने दुख से...
समीर लाल
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अगले साल पुस्तक मेले में आने का मन है. उत्साही लेखक विमोचन के लिए आग्रह करेंगे ऐसा मुझे लगता है. ऐसा लगने का कारण अखबार वालों का अब मेरे नाम के साथ ’लेखक कनाडा निवासी वरिष्ट व्यंग्यकार हैं’ लिखना है. नाम के साथ वरिष्ट लगने लगे तो लिखना कम और ज्ञान ज्यादा बांटना चाह...