ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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कायल एक ऐसी विकट और विराट चीज है जो कोई भी हो सकता है, कभी भी हो सकता है, किसी भी बात से हो सकता है और किसी पर भी हो सकता है.मैने देखा है कि कोई किसी की आवाज का कायल हो जाता है, कोई किसी की सुन्दरता का, कोई किसी के लेखन का, कोई किसी के स्वभाव का, कोई किसी के नेतृत्...
समीर लाल
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पूरा भारत घर में बंद है सिर्फ उनको छोड़कर जिनको बाहर होना चाहिये जैसे डॉक्टर, पुलिस आदि. साथ ही कुछ ऐसे भी बाहर हैं जो पुलिस से प्रसाद लिए बिना अंदर नहीं जाना चाहते. मगर घर में बंद लोग पूरी ताकत से व्हाटसएप पर चालू हैं. अगर व्हाटसएप का मैसेज मैसेज न हो कर एक पैसे वा...
देवेन्द्र पाण्डेय
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इतने तनाव में क्यों हो? धूप में पैदल चलकर आ रहे हो? नहीं भाई, समाचार देख कर आ रहा हूँ। अरे! रे! रे! इतना जुलुम क्यों किया अपने ऊपर? जेठ की दोपहरी में दस किमी पैदल चलना मंजूर, समाचार देखना नामंजूर। क्या बताएं यार! आज छुट्टी थी, कोई काम भी नहीं था, बाह...
समीर लाल
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चुनाव के परिणाम आ गये हैं. जनता ने अपना आदेश दे दिया है. टीवी पर तो सभी नेताओं ने इसे जनादेश कहते हुए सर माथे से लगा लिया है. यही एक मात्र दिन होता हैं जब जनता को आदेश देने की अनुमति होती है. अब इसके बाद पाँच साल तक वो इस गुस्ताखी की सजा काटती है कि तेरी इतनी हिम्म...
समीर लाल
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आज सुबह जब नींद खुली तो खिड़की से झांक कर देखा. सूरज अपने चरम पर झिलमिल मोड में चमक रहा था. खुश हुए कि आज बड़े दिन बाद सही मौसम है. तैयार होकर जैसे ही बाहर निकले, लगा जैसे करेंट लग गया हो. भाग कर वापस घर में आये और ऐलेक्सा से पूछा कि क्या तापमान है? ऐलेक्सा अभी राजनि...
देवेन्द्र पाण्डेय
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जीजा और साले ने मिलकर शहर से दूर, एक सुनसान इलाके में, मकान बनाने की इच्छा से, तीन बिस्वे का एक प्लॉट खरीदा। मिलकर खरीदने के पीछे कई कारण थे। पहला कारण तो यह कि दोनो की हैसियत इतनी अच्छी नहीं थी कि अकेले पूरे प्लॉट का दाम चुका सकें। दूसरा कारण यह कि सुनसान इलाके मे...
देवेन्द्र पाण्डेय
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हमारे देश मे दरवाजा बंद करना कभी सुहागरात की निशानी होती थी, अब स्वच्छता अभियान की पहचान है। इसके लिए आदरणीय अमित सर और दूरदर्शन के शुक्रगुजार हैं। खाना खाते समय टी वी खोलकर दूरदर्शन का समाचार देखने वालों के सामने कभी-कभी बड़ी असहज स्थिति आ जाती है। इधर एक कौर मुँह...
समीर लाल
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बचपन में हमसे बीबीसी रेडिओ और अखबार पढ़ने को कहा जाता था खासकर संपादकीय ताकि भाषा का ज्ञान समृद्ध हो. वाकई बड़ी सधी हुई वाणी रेडिओ पर और जबरदस्त संपादकीय और समाचार होते थे अखबारों में. अखबारों में वर्तनी की त्रुटियाँ कभी देखने में न आतीं. कभी किसी शब्द में संशय हो तो...
देवेन्द्र पाण्डेय
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जिसे देखते ही पूरे शरीर मे उत्तेजना बढ़ जाती है उस माल का नाम पटाखा माल है। जो आँच दिखाते ही धड़ाम से फूट जाय, जिसके फूटने पर आपका मन आंनद से भर जय तो समझो वही पटाखा माल है। आँच दिखाते-दिखाते आपकी पूरी बत्ती जल जाय और धड़ाम की आवाज भी कानों में न सुनाई पड़े तो समझो वो...
समीर लाल
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नये नये कनाडा आये थे. जब पहली बार अपने एक नये गोरे दोस्त के मूँह से सुना था कि इस बार वीक एण्ड पर वो अपनी मम्मी और उनके बॉय फेण्ड के घर डिनर पर जायेगा तो बड़ा अजीब सा लगा था. हम जिस संस्कृति और जो देखते हुए बड़े होते हैं, उसी के आधार पर हर बात का एक निश्चित खाका दिमा...