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ANITA LAGURI (ANU)
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झमेले ज़िन्दगी के तमाम बढ़ गये           मार खा...
सुशील बाकलीवाल
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कुछ करना है तो डटकर चल, थोड़ा दुनियां से हटकर चल ।लीक पर तो सभी चल लेते है, कभी इतिहास को पलटकर चल ।बिना काम के मुकाम कैसा? बिना मेहनत के, दाम कैसा ?जब तक ना हाँसिल हो मंज़िल, तो राह में  राही आराम कैसा ?अर्जुन सा, निशाना रख, मन में ना कोई बहाना रख ।जो लक्ष्य...