ब्लॉगसेतु

अजय  कुमार झा
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भारतीय समाज प्राचीन काल से ही खुद को स्वस्थ या कहें कि चुस्त दुरुस्त रखने के लिए कभी भी विशेष प्रयत्नशील नहीं रहा है | इसका एक वाज़िब कारण यह भी था की लोगों की शारीरिक श्रम वाली दिनचर्या व चर्बी रहित  सादा मगर पौष्टिक भोजन करने की परम्परा उन्हें आतंरिक रूप से इ...
अजय  कुमार झा
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शिक्षक दिवस पर प्रकाशित एक आलेख शिक्षकों के लिए कक्षा में दो ही विद्यार्थी पसंदीदा होते हैं अक्सर , एक वो जो खूब पढ़ते लिखते हैं और हर पीरियड में सावधान होकर एकाग्र होकर उन शिक्षकों की बात सुनते समझते हैं और फिर परीक्षा के दिनों में उनके तैयार प्रश्नपत्रों को ब...
अजय  कुमार झा
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जैसे जैसे ब्लॉगिंग की तरफ लौट रहा हूँ तो देख रहा हूँ कि हिंदी ब्लॉगिंग का प्रवाह सच में ही बहुत कम हो गया है | हालत ये है की पूरे दिन में यदि पचास पोस्टें भी नज़रों के सामने से गुज़र रही हैं तो उसमें से दस तो वही पोस्टें हैं जो इन पोस्टों के लिंक्स लगा रही हैं | &nbs...
अजय  कुमार झा
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कहते हैं कि संगत का असर बहुत पड़ता है और बुरी संगत का तो और भी अधिक | बात उन दिनों की थी जब हम शहर से अचानक गाँव के वासी हो गए थे | चूंकि सब कुछ अप्रत्याशित था और बहुत अचानक हुआ था इसलिए कुछ भी व्यवस्थित नहीं था | माँ और बाबूजी पहले ही अस्वस्थ चल रहे थे | हम सब धीरे...
शिवम् मिश्रा
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पिछले कुछ वर्षों में भारतीय राजनीति में इतना बदलाव तो यकीनन ही आया है कि , अब लोगों को वो राजनीति स्पष्ट दिख रही है और शायद समझ भी आ रही है जिससे कभी आम लोगों का दूर दूर तक यदि वास्ता था तो सिर्फ इतना की वोटिंग वाले दिन एक छुट्टी मिलेगी | अब न सिर्फ मतदाताओं का मतद...
शिवम् मिश्रा
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सरकार ने आखिरकार आरक्षण के भूत की एक बार फिर से चुटिया पकड़ ली है | हालांकि मेरे जैसे एक साधारण व्यक्ति जो सिर्फ अपने श्रम और संघर्ष पर अपना मुकाम हासिल कर पाया के लिए किसी भी तरह का आरक्षण , ठीक उस बैसाखी की तरह है जो दो पाँव से चलने दौड़ने वाले तक को जबरन थमाया जा...
शिवम् मिश्रा
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धंधे में शामिल होने जाता एक एम्बुलेंस आज फिर वही छ: साल पुरानी वाली तल्ख़ स्थतियों से गुजरा जिनसे मैं और परिवार तब गुजरे थे जब मैं अचानक ही बहुत अधिक अस्वस्थ होकर अस्पताल में भर्ती हो गया था और तब से लेकर आज तक जाने कितनी ही बार ऐसी अनेकों परिस्थितयों हालातों घ...
अजय  कुमार झा
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नन्हीं गोरैया कुकू कल शाम तो दिल्ली में बहुत ही तेज़ बारिश हुई , हवा भी उतनी ही तेज़ होने के कारण और ज्यादा मारक साबित हुई | बारिश से हुए जलभराव ने कितना ताण्डव मचाया ये कहने सुनने की जरूरत नहीं | मगर अचानक ही बालकनी में पानी निकालते समय ,अचानक ही इस नन्हीं गोरै...
शिवम् मिश्रा
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गुप्तकाशी में बारिश अब ये बात भी बहुत बार हम आप ही दोहरा चुके हैं की ब्लॉगिंग  की रफ़्तार को धीमा करने या ऐसा महसूस होने में जितना बड़ा रोल फेसबुक और अन्य जैसी सोशल नेट्वर्किंग साइट्स ने किया उतनी ही बड़ी भूमिका खुद हम ब्लॉगर्स की भी रही | अपनी हाथों से सींच...
अजय  कुमार झा
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कुछ दिनों पूर्वसमय करीब शाम के आठ बजेस्थान : पूर्व दिल्ली की कोई गलीपुत्र आयुष को जुडो कराटे की प्रशिक्षण कक्षा से वापस लेकर लौट रहा हूँ | तीन दिनों से लगातार हो रही बूंदाबांदी ने सड़क को घिचपिच सा कर दिया है | अचानक ही स्कूटी की तेज़ लाईट में सड़क के बीचों बीच कोई औं...